Wednesday, August 7, 2013

तेनालीराम की कहानी / कौन बड़ा


एक बार राजा कृष्णदेव राय महल में अपनी रानी के पास विराजमान थे। तेनालीराम की बात चली, तो बोले-सचमुच हमारे दरबार में उस जैसा चतुर कोई नहीं है। इसीलिए अभी तक तो कोई उसे हरा नही पाया है।
सुनकर रानी बोली-आप कल तेनालीराम को भोजन के लिए महल में आमंत्रित करें। मैं उसे जरूर हरा दूंगी। राजा ने मुस्कुराकर हामी भर ली। अगले दिन रानी ने अपने हाथों से स्वादिष्ट पकवान बनाए। राजा के साथ बैठा। तेनालीराम उन पकवानों की जी भर प्रशंसा करता हुआ, खाता जा रहा था। खानें के बाद रानी ने उसे बढया पान का बीडा भी खाने को दिया। तेनालीराम मुस्कुराकर बोला-’सचमुच, आज जैसा खाने का आनंद तो मुझे कभी नहीं आया!‘ तभी रानी ने अचानक पूछ लिया-अच्छा, तेनालीराम, एक बात बताओ। राजा ज्यादा बडे है या मैं? अब तो तेनालीराम चकराया। राजा-रानी दोनों ही उत्सुकता से देख रहे थे कि भला तेनालीराम क्या जवाब देता है।
अचानक तेनालीराम को जाने क्या सुझा, उसने दोनों हाथ जोडकर पहले धरती को प्रणाम किया, फिर आसमान को। फिर एकाएक जमीन पर गिर पडा। रानी घबराकर बोली- अरे-अरे, यह क्या तेनालीराम? तेनालीराम उठकर खडा हुआ, बोला- महारानी जी, मेरे लिए तो आप धरती है, राजा आसमान! दोनों में से किसे छोटा, किसे बडा कहूं, समझ में नही आ रहा! वैसे आज महारानी के हाथों का बना भोजन इतना स्वादिष्ट  था कि उन्ही को बडा कहना होगा। इसलिए मैं धरती को ही दंडवत प्रणाम कर रहा था। सुनकर राजा और रानी दोनों की हंसी छुट गई। रानी बोली- सचमुच तुम चतुर हो, तेनालीराम। मुझे जिता दिया, पर हारकर भी खुद जीत गए। इस पर महारानी और राजा कृष्णदेव राय के साथ तेनालीराम भी खिल-खिलाकर हंस दिए।

Tuesday, July 30, 2013

हनुमान चालीसा व्याख्या सहित

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि।
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौ पवन कुमार।
बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेस विकार॥

सद्गुरु के चरण कमलों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को स्वच्छ कर, श्रीराम के दोषरहित यश का वर्णन करता हूँ जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष रूपी चार फल देने वाला है। स्वयं को बुद्धिहीन जानते हुए, मैं पवनपुत्र श्रीहनुमान का स्मरण करता हूँ जो मुझे बल, बुद्धि और विद्या प्रदान करेंगे और मेरे मन के दुखों का नाश करेंगे॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥
राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥२॥

श्री हनुमान की जय हो जो ज्ञान और गुण के सागर हैं, तीनों लोकों में वानरों के ईश्वर के रूप में विद्यमान श्री हनुमान की जय हो॥ आप श्रीराम के दूत, अपरिमित शक्ति के धाम, श्री अंजनि के पुत्र और पवनपुत्र नाम से जाने जाते हैं॥

महावीर विक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा॥४॥

आप महान वीर और बलवान हैं, वज्र के समान अंगों वाले, ख़राब बुद्धि दूर करके शुभ बुद्धि देने वाले हैं,  आप स्वर्ण के समान रंग वाले, स्वच्छ और सुन्दर वेश वाले हैं, आपके कान में कुंडल  शोभायमान हैं और आपके बाल घुंघराले हैं॥
हाथ वज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै॥५॥
शंकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बंदन॥६॥

आप हाथ में वज्र (गदा) और ध्वजा धारण करते हैं, आपके कंधे पर मूंज का जनेऊ शोभा देता है, आप श्रीशिव के अंश और श्रीकेसरी के पुत्र हैं, आपके महान तेज और प्रताप की सारा जगत वंदना करता है॥
विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥७॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लषन सीता मन बसिया॥८॥

आप विद्वान, गुणी और  अत्यंत बुद्धिमान हैं, श्रीराम के कार्य करने के लिए सदैव उत्सुक रहते हैं, आप श्रीराम कथा सुनने के प्रेमी हैं और आप श्रीराम, श्रीसीताजी और श्रीलक्ष्मण के ह्रदय में बसते हैं॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
विकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे।
रामचंद्र के काज सँवारे॥१०॥

आप सूक्ष्म रूप में श्रीसीताजी के दर्शन करते हैं, भयंकर रूप लेकर लंका का दहन करते हैं, विशाल रूप लेकर राक्षसों का नाश करते हैं और श्रीरामजी के कार्य में सहयोग करते हैं॥

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥११॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥१२॥

आपने संजीवनी बूटी लाकर श्रीलक्ष्मण की प्राण रक्षा की, श्रीराम आपको हर्ष से हृदय से लगाते हैं। श्रीराम आपकी बहुत प्रशंसा करते हैं और आपको श्रीभरत के समान अपना प्रिय भाई मानते हैं॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावै।
अस कहि श्रीपति कंठ  लगावै॥१३॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥

आपका यश हजार मुखों से गाने योग्य है, ऐसा कहकर श्रीराम आपको गले से लगाते हैं। सनक आदि ऋषि, ब्रह्मा आदि देव और मुनि,  नारद, सरस्वती जी और शेष जी -
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।
कबि कोविद कहि सके कहाँ ते॥१५॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राजपद दीन्हा॥१६॥

यम, कुबेर आदि दिग्पाल भी आपके यश का वर्णन नहीं कर सकते हैं, फिर कवि और विद्वान कैसे उसका वर्णन कर सकते हैं। आपने सुग्रीव का उपकार करते हुए उनको श्रीराम से मिलवाया जिससे उनको राज्य प्राप्त हुआ॥

तुम्हरो मंत्र विभीषन माना।
लंकेश्वर भए सब जग जाना॥१७॥
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥१८॥

आपकी युक्ति विभीषण माना और उसने लंका का राज्य प्राप्त किया, यह सब संसार जानता है। आप सहस्त्र योजन दूर स्थित सूर्य को मीठा फल समझ कर खा लेते हैं॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख  माहीं।
जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं॥१९॥
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे  तेते॥२०॥

प्रभु श्रीराम की अंगूठी को मुख में रखकर आपने समुद्र को लाँघ लिया, आपके लिए यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है। इस संसार के सारे कठिन कार्य आपकी कृपा से आसान हो जाते हैं॥

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रच्छक काहू को डरना॥२२॥

श्रीराम तक पहुँचने के द्वार की आप सुरक्षा करते हैं, आपके आदेश के बिना वहाँ प्रवेश नहीं होता है, आपकी शरण में सब सुख सुलभ हैं, जब आप रक्षक हैं तब किससे डरने की जरुरत है॥
आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हाँक तें काँपै॥२३॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै॥२४॥

अपने तेज को आप ही सँभाल सकते हैं, तीनों लोक आपकी ललकार से काँपते हैं। केवल आपका नाम सुनकर ही भूत और पिशाच पास नहीं आते हैं॥
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥
संकट तें हनुमान छुडावैं।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥२६॥

महावीर श्री हनुमान जी का निरंतर नाम जप करने से रोगों का नाश होता है और वे सारी पीड़ा को नष्ट कर देते हैं। जो श्री हनुमान जी का मन, कर्म और वचन से स्मरण करता है, वे उसकी सभी संकटों से रक्षा करते हैं॥

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा॥२७॥
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल  पावै॥२८॥

सबसे पर, श्रीराम तपस्वी राजा हैं, आप उनके सभी कार्य बना देते हैं। उनसे कोई भी इच्छा रखने वाले, सभी लोग अनंत जीवन का फल प्राप्त करते हैं॥
चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥
साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥

आपका प्रताप चारों युगों में विद्यमान रहता है, आपका प्रकाश सारे जगत में प्रसिद्ध है। आप साधु- संतों की रक्षा करने वाले, असुरों का विनाश करने वाले और श्रीराम के प्रिय हैं॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता॥३१॥
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥

आप आठ सिद्धि और नौ निधियों के देने वाले हैं, आपको ऐसा वरदान माता सीताजी ने दिया है। आपके पास श्रीराम नाम का रसायन है, आप सदा श्रीराम के सेवक बने रहें॥
तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३॥
अंत काल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरि – भक्त कहाई॥३४॥

आपके स्मरण से जन्म- जन्मान्तर के दुःख भूल कर भक्त श्रीराम को प्राप्त करता है और अंतिम समय में श्रीराम धाम (वैकुण्ठ)  में जाता है और वहाँ जन्म लेकर हरि का भक्त कहलाता है॥

और देवता चित न धरई।
हनुमत से हि सर्व सुख करई॥३५॥
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६॥

दूसरे देवताओं को मन में न रखते हुए, श्री हनुमान से ही सभी सुखों की प्राप्ति हो जाती है। जो महावीर श्रीहनुमान जी का नाम स्मरण करता है, उसके संकटों का नाश हो जाता है और सारी पीड़ा ख़त्म हो जाती है॥
जै जै जै हनुमान गोसाई।
कृपा करहु गुरुदेव की नाई॥३७॥
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई॥३८॥

भक्तों की रक्षा करने वाले श्री हनुमान की जय हो, जय हो, जय हो, आप मुझ पर गुरु की तरह कृपा करें। जो कोई इसका सौ बार पाठ करता है वह जन्म-मृत्यु के बंधन से छूटकर महासुख को प्राप्त करता है॥
जो यह पढ़ै हनुमान चलीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥३९॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ ह्रदय महँ डेरा॥४०॥

जो इस श्री हनुमान चालीसा को पढ़ता है उसको सिद्धि प्राप्त होती है, इसके साक्षी भगवान शंकर है । श्री तुलसीदास जी कहते हैं, मैं सदा श्रीराम का सेवक हूँ, हे स्वामी! आप मेरे हृदय में निवास कीजिये॥

पवन तनय संकट हरन मंगल मूरति रूप।
राम लषन सीता सहित ह्रदय बसहु सुर भूप॥

पवनपुत्र, संकटमोचन, मंगलमूर्ति श्री हनुमान आप देवताओं के ईश्वर श्रीराम, श्रीसीता जी और श्रीलक्ष्मण के साथ मेरे हृदय में निवास कीजिये॥
जिसके साक्षी भगवान शंकर है

Friday, July 5, 2013

सतीश कुमार मोहन लाम्बड़ा के सरपंच निर्वाचित

सतीश कुमार मोहन पंजाब में हुए पंचायत चुनावों  में लाम्बड़ा (जालंधर ) से सरपंच चुनें गए हैं. उन्हें और मोहयाल सभा लाम्बड़ा के अध्यक्ष गौतम मोहन तथा मोहयाल सभा कनाडा के सेक्रेटरी गौरव मोहन को तथा सभी मोहयालों को बधाई !

H1B Visa :Good News For Indians

अमेरिकी सीनेट के फैसले से भारतीय प्रसन्न


Americam Supreme Courtवाशिंगटन, 2 जुलाई 2013--अमेरिकी सीनेट में व्यापक आव्रजन विधेयक पारित होने से लेकर सर्वोच्च न्यायालय से आए कई तरह के फैसले के चलते यह एक यादगार सप्ताह बन गया है, और खास बात यह कि ये फैसले व्यापक तौर पर भारतीयों पर असर डालने वाले हैं।
अमेरिकी सीनेट ने आव्रजन विधेयक को 32 के मुकाबले 68 मतों से पारित कर दिया था। इस विधेयक का भारतीय और अमेरिकी आईटी कंपनियों पर मिलाजुला असर होने की संभावना है। रिपब्लिकन पार्टी के 14 सीनेटरों ने इस विधेयक के पक्ष में डेमोक्रेटिक पार्टी के 54 सीनेटरों का साथ दिया।
भारतीय आईटीकर्मी अमेरिकी सरकार के इस फैसले से काफी प्रसन्न हैं . एच1बी वीजा की सीमा 85,000 से बढ़ाकर 195,000 कर दी गई है। इससे भारतीय पेशेवरों की अमेरिका में रोजगार पाने की संभाना बहुत अधिक बढ़ जाएगी। भारत में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित के छात्रों को अब ग्रीन कार्ड मिलने की उम्मीद और बढ़ गई है। आलोचकों को अवश्य इस बात की शिकायत हो सकती है कि इससे भारत से प्रतिभा पलायन की गति और अधिक बढ़ेगी।
इसके बावजूद दक्षिण एशियाई संगठनों का मानना है कि यह काफी त्रुटिपूर्ण विधेयक है। इसमें परिवार आधारित आव्रजन को रोकने की कोशिश की गई है। इसमें सहोदरों और शादीशुदा वयस्क बच्चों के आव्रजन और नागरिकता पर बेवजह बाधाएं खड़ी करने की कोशिश की गई है। अमेरिका में 1.1 करोड़ प्रवासी हैं, जिसमें 260,000 भारतीय हैं। इनमें भारतीय आईटी पेशेवरों की बहुलता है।
प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है और वे अपने एजेंडे पर काम कर रहे हैं। अमेरिकी उद्योग जगत, भारतीय तकनीकी कर्मियों का प्रभाव समूह और अन्य दक्षिण एशियाई संगठन विधेयक के राष्ट्रपति बराक ओबामा के समक्ष आने से पहले उनमें अपने मनपसंद बदलाव के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।
दूसरी ओर अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा क्लिंटन युग के डिफेंस ऑफ मैरिज एक्ट के एक प्रमुख खंड को असंवैधानिक ठहरा दिए जाने के कारण भी खुश हैं, क्योंकि यह केवल महिला और पुरुषों के बीच के विवाह को ही मान्यता देता था।

Tuesday, June 25, 2013

हिमालय में जल-प्रलय / अशोक लव


पंद्रह-सोलह जून की वर्षा ने उत्तराखंड में जो विनाश-लीला की है, उसमें हजारों व्यक्ति अपने प्राण गँवा चुके हैं. सैंकडों घर नदियों में बह गए हैं. गाँवों के गाँवों का कोई आता-पता नहीं है. ज़िंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते हज़ारों लोग पहाड़ों के अनजान रास्तों में फंसे पड़े हैं. हज़ारों पहाड़ों में भटक रहे हैं. मृत्यु का ऐसा तांडव अपने पीछे अनेक प्रश्न छोड़ गया है. संकट की इस घड़ी में स्वयं-सेवी संस्थाओं को आगे आना चाहिए. विस्थापित हो चुके लोगों को फिर से बसाने के लिए, सड़कों के निर्माण के लिए, संचार माध्यमों की बहाली के लिए, अपार धनराशि की आवश्यकता होगी. गावों और नगरों में जो विनाश-लीला हुई उसके लिए स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ताओं द्वारा सेवा की आवश्कता होगी. सड़कों के निर्माण के पश्चात यह सबसे बड़ा कार्य होगा. अभी भी इस विनाश-लीला का आकलन नहीं हो पाया है. विभिन्न नगरों की संस्थाओं को आगे आकर विस्थापितों तक भोजन और पानी पहुँचाना सबसे बड़ी आवश्कता बन चुकी है. भूखे-प्यासे स्थानीय निवासी सड़कों पर उतर आए हैं. पर्यटकों की समस्याएँ स्थानीय निवासियों से भिन्न हैं. उनकी ओर भी तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है. सारी उम्र की कमाई से बनाए माकन ज़मीन में धंस गए हैं. कई टनों मलबे के नीचे दब गए हैं. कुछ मकानों में मलबा भर गया है. अनेक लोगों की दुकानें बह गई हैं. कईयों की आजीविका के साधन नहीं रहे. ऐसी भयावह स्थिति में मानवीयता की कारुणिक पुकार को सुनने की आवश्यकता है. केदारनाथ धाम के पुनरोत्थान के लिए भी धार्मिक संस्थाओं को आगे आना चाहिए. वे धार्मिक संस्थाएं जो मदिरों के लिए अपार धनराशि दान में लेती हैं, उन्हें आगे आना चाहिए. इस विनाश-लीला के लिए पहाड़ों पर अनेक कारणों से बढ़ता बोझ है. तीर्थ-स्थल पिकनिक–स्पॉट बन गए हैं. पहाड़ों का दोहन हो रहा है. पर्वतीय पर्यावरण की सुरक्षा की कोई नीति नहीं है. अवैध खनन और अवैध निर्माण ने पर्यावरण के संतुलन को बिगाड़ दिया है. ये वे मुद्दे हैं जिन पर अभी से चिंतन और क्रियान्वयन की आवयश्कता है. तत्काल आवश्यकता है लोगों की जान बचाने की और उन तक भोजन पहुँचाने की. आशा है संकट की घड़ी में दानी सज्जन आगे आएँगे और अपना कर्तव्य निभायेंगे.
Like · · Unfollow Post · ·

Thursday, June 6, 2013

मोहयाल अभिनेता सुनील दत्त , जन्म छः जून 1929

सुनील दत्त जन्म- 6 जून, 1929


सुनील दत्त (जन्म- 6 जून, 1929 गाँव खुर्दी,  पंजाब (पाकिस्तान); मृत्यु- 25 मई, 2005, मुंबई) भारतीय सिनेमा में एक ऐसे अभिनेता थे जिनको पर्दे पर देख एक आम हिन्दुस्तानी अपनी ज़िंदगी की झलक देखता था। सुनील दत्त 2004-05 के दौरान भारत सरकार में युवा मामलों और खेल विभाग में कैबिनेट मंत्री भी रहे। सुनील दत्त का वास्तविक नाम बलराज रघुनाथ दत्त था।
जीवन परिचय
हिन्दी सिनेमा जगत में सुनील दत्त को एक ऐसी शख़्सियत के तौर पर याद किया जाता है, जिन्होंने फ़िल्म निर्माण, निर्देशन और अभिनय से लगभग चार दशक तक दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। उनके किरदार वास्तविक जीवन के बहुत क़रीब होते थे और उनका व्यक्तित्व भी उनके किरदार की तरह उज्ज्वल और प्रभावशाली रहा। सुनील दत्त का जन्म 6 जून, 1929 को झेलम ज़िले के खुर्दी गाँव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। सुनील दत्त बचपन से ही अभिनय के क्षेत्र में जाना चाहते थे। बलराज साहनी फ़िल्म इंडस्ट्री में अभिनेता के रुप में उन दिनों स्थापित हो चुके थे, इसे देखते हुए उन्होंने अपना नाम बलराज दत्त से बदलकर सुनील दत्त रख लिया। उनका बचपन यमुना नदी के किनारे मंदाली गाँव में बीता जो हरियाणा प्रदेश में है। सुनील दत्त इसके बाद लखनऊ चले गये और जहाँ पर वह अख्तर नाम से अमीनाबाद गली में एक मुसलमान औरत के घर पर रहे। कुछ समय बाद अपने सपनों को पूरा करने के लिए वह मुंबई चले गए।
कार्यक्षेत्र
मुम्बई आकर सुनील दत्त ने मुंबई परिवहन सेवा के बस डिपो में चेकिंग क्लर्क के रुप में कार्य किया, जहाँ उनको 120 रुपए महीने के मिलते थे। फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए 1955 से 1957 तक सुनील दत्त संघर्ष करते रहे। हिन्दी सिनेमा जगत में अपने पैर जमाने के लिए वह ज़मीन की तलाश में एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो भटकते रहे थे। उसके बाद सुनील दत्त ने ‘जय हिंद कॉलेज’ में पढ़कर स्नातक किया। सुनील दत्त ने रेडियो सिलोन की हिन्दी सेवा के उद्घोषक के तौर पर अपना कैरियर शुरू किया था। जहाँ वह फ़िल्मी कलाकारों का इंटरव्यू लिया करते थे। एक इंटरव्यू के लिए उन्हें 25 रुपये मिलते थे। यह दक्षिण एशिया की पचास के दशक मे सबसे लोकप्रिय रेडियो सेवा थी।
विवाह
सुनील दत्त ने ‘मदर इंडिया’ फ़िल्म की शूटिंग के दौरान एक आग की दुर्घटना में नर्गिस को अपनी जान की परवाह किये बिना बचाया। इस हादसे में सुनील दत्त काफ़ी जल गए थे तथा नर्गिस पर भी आग की लपटों का असर पड़ा था। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया और उनके स्वस्थ होकर बाहर निकलने के बाद दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया। नर्गिस 11 मार्च, 1958 में सुनील दत्त की जीवन संगिनी बन गई।
फ़िल्मी सफर की शुरुआत
सुनील दत्त की पहली फ़िल्म ‘रेलवे प्लेटफॉर्म’ 1955 में प्रदर्शित हुई, जिसमें उन्होंने अभिनेता के रूप में कार्य किया। अपनी पहली फ़िल्म से उन्हें कुछ ख़ास पहचान नहीं मिली। उन्होंने इस फ़िल्म के बाद ‘कुंदन’, ‘राजधानी’, ‘किस्मत का खेल’ और ‘पायल’ जैसी कई छोटी फ़िल्मों में अभिनय किया, लेकिन इनमें से उनकी कोई भी फ़िल्म सफल नहीं हुई।
मदर इंडिया
1957 में प्रदर्शित हुई फ़िल्म ‘मदर इंडिया’ से सुनील दत्त को अभिनेता के रूप में ख़ास पहचान और लोकप्रियता मिली। उन्होंने इस फ़िल्म में एक ऐसे युवक ‘बिरजू’ की भूमिका निभाई जो गाँव में सामाजिक व्यवस्था से काफ़ी नाराज़ है और इसी की वजह से विद्रोह कर डाकू बन जाता है। साहूकार से बदला लेने के लिए वह उसकी पुत्री का अपहरण कर लेता है लेकिन इस कोशिश में अंत में वह अपनी मां के हाथों मारा जाता है। इस फ़िल्म में नकारात्मक हीरो का किरदार निभाकर वह दर्शकों के दिल में जगह बनाने में सफल रहे।
वक़्त
सुनील दत्त की सुपरहिट फ़िल्म ‘वक़्त’ 1965 में प्रदर्शित हुई। उनके सामने इस फ़िल्म में बलराज साहनी,  राजकुमार, शशि कपूर और रहमान जैसे नामी सितारे थे,  इसके बावज़ूद सुनील अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहे। सुनील दत्त के सिने करियर का 1967 सबसे महत्त्वपूर्ण साल साबित हुआ। उस साल उनकी ‘मिलन’, ‘मेहरबान’ और ‘हमराज़’ जैसी सुपरहिट फ़िल्में प्रदर्शित हुई, जिनमें उनके अभिनय के नए रूप देखने को मिले। इन फ़िल्मों की सफलता के बाद वह अभिनेता के रुप में शोहरत की बुलंदियों पर जा पहुंचे।
सुनील दत्त भारतीय सिनेमा के उन अभिनेताओं में से एक है जिनकी फ़िल्मों ने पचास और साठ के दशक में दर्शकों पर अमित छाप छोड़ी। ‘मदर इंडिया’ की सफलता के बाद उन्हें ‘साधना’ (1958), ‘सुजाता’ (1959), ‘मुझे जीने दो’ (1963), ‘ख़ानदान’ (1965 ), ‘पड़ोसन’ (1967 ) जैसी सफल फ़िल्मों से भारतीय दर्शको के बीच एक सफल अभिनेता के रूप में पहचान मिली। सुनील दत्त को निर्देशक बी. आर. चोपड़ा के साथ ‘गुमराह’ (1963), ‘वक़्त’ (1965 ) और ‘हमराज़’ (1967) जैसी फ़िल्मों में निभाई गई यादगार भूमिकाओं ने भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय किया।
सुनील दत्त का फ़िल्मी सफ़र
वर्ष
फ़िल्म
नायिका
निर्देशक
1965 खानदान नूतन ए.भीम. सिंह
1966 गबन साधना ऋषिकेश मुखर्जी
मेरा साया साधना राज खोसला
आम्रपाली वैजयंती माला लेख टंडन
मेहरबान नूतन ए. भीम सिंह
1967 हमराज विम्मी बी. आर.चोपड़ा
मिलन नूतन ए. सुब्बाराव
1968 पड़ोसन सायरा बानो ज्योति स्वरूप
गौरी नूतन,मुमताज ए.भीम सिंह
1969 चिराग आशा पारिख राज खोसला
प्यासी शाम शर्मिला टैगौर अमर कुमार
मेरी भाभी वहीदा रहमान खालिद अख्तर
भाई-बहन नूतन ए.भीम सिंह
1970 दर्पण वहीदा रहमान ए.सुब्बा राव
भाई-भाई आशा पारिख राजा नवाथे
ज्वाला मधुबाला एम.वी.रामन
1971 रेश्मा और शेरा राखी, वहीदा रहमान सुनील दत्त
1972 जमीन-आसमान रेखा ए.वीरप्पा
जिंदगी जिंदगी वहीदा रहमान तपन सिन्हा
1973 हीरा आशा पारिख सुल्तान अहमद
प्राण जाए पर वचन न जाए रेखा अली राजा
1974 छतीस घंटे माला सिन्हा राज तिलक
गीता मेरा नाम साधना साधना नैयर
कोरा बदन
बी.एस. शाद
1975 हिमालय से ऊंचा मल्लिका साराभाई बी.एस.थापा
नीलिमा
पुष्पराज
उम्रकैद रीना राय सिकंदर खन्ना
जख्मी आशा पारिख राजा ठाकुर
1976 नागिन रेखा राजकुमार कोहली
नहले पे दहला सायरा बानो राज खोसला
1952 आखिरी गोली लीना चंद्रावरकर शिबू मित्रा
चरणदास
बी.एस. थापा
दरिंदा परवीन बाबी कौशल भारती
ज्ञानी जी रीना राय चमन पिल्ले,प्रेमनाथ
पापी रीना राय ओ.पी.रल्हन
1978 डाकू और जवान लीना चंद्रावरकर सुनील दत्त
काला आदमी सायरा बानो रमेश लखनपाल
राम कसम रेखा चांद
1979 जानी दुश्मन रीना राय राजकुमार कोहली
अहिंसा रेखा चांद
मुक़ाबला रीना राय राजकुमार कोहली
1980 एक गुनाह और सही परवीन बाबी योगी कथूरिया
गंगा और सूरज रीना राय ए. सलाम
लहू पुकारेगा सायरा बानो अख्तर-उल-ईमान
शान राखी रमेश सिप्पी
यारी दुश्मनी रीना राय सिकंदर खन्ना
1981 रॉकी राखी सुनील दत्त
1982 बदले की आग रीना राय राजकुमार कोहली
1983 दर्द का रिश्ता स्मिता पाटिल सुनील दत्त

मल्टी स्टारर फ़िल्मों का अहम हिस्सा
सुनील दत्त के सिने करियर पर नज़र डालने पर पता लगता है कि वह मल्टी स्टारर फ़िल्मों का अहम हिस्सा रहे है। फ़िल्म निर्माताओं को ऐसी फ़िल्मों में जब कभी अभिनेता की ज़रूरत होती थी वह उन्हें नज़र अंदाज़ नहीं कर पाते थे। सुनील दत्त की मल्टीस्टारर सुपरहिट फ़िल्मों में ‘नागिन’, ‘जानी दुश्मन’, ‘शान’, ‘बदले की आग’, ‘राज तिलक’,  ’काला धंधा गोरे लोग’, ‘वतन के रखवाले’, ‘परंपरा’,  ’क्षत्रिय’ आदि प्रमुख हैं।
मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस
1993 में प्रदर्शित फ़िल्म ‘क्षत्रिय’ के बाद सुनील दत्त लगभग 10 वर्ष तक फ़िल्म अभिनय से दूर रहे। विधु विनोद चोपड़ा के ज़ोर देने पर उन्होंने 2007 में प्रदर्शित फ़िल्म ‘मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस’ में अभिनय किया। फ़िल्म में उन्होंने अभिनेता संजय दत्त के पिता की भूमिका निभाई। पिता-पुत्र की इस जोड़ी को दर्शकों ने काफ़ी पसंद किया। इस फ़िल्म के माध्यम से पहली बार पिता पुत्र (सुनील दत्त और संजय दत्त) एक साथ पर्दे पर नजर आए थे। हालांकि फ़िल्म ‘क्षत्रिय’ और ‘रॉकी’ में भी सीनियर और जूनियर दत्त ने साथ काम किया मगर एक भी दृश्य में वे साथ में नहीं थे।
फ़िल्म निर्देशन
फ़िल्म ‘यादें’  (1964) के साथ सुनील दत्त ने फ़िल्म निर्देशन में भी क़दम रखा। इस पूरी फ़िल्म में सिर्फ एक युवक की भूमिका थी जो अपने संस्मरण को याद करता रहता है। इस किरदार को सुनील दत्त ने निभाया था। उनकी यह फ़िल्म बहुत सफल नहीं रही, लेकिन भारतीय सिनेमा जगत के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा गई।
फ़िल्म निर्माण
सुनील दत्त ने 1963 में प्रदर्शित फ़िल्म ‘यह रास्ते है प्यार के’ के ज़रिए फ़िल्म निर्माण के क्षेत्र में भी क़दम रख दिया। यह फ़िल्म टिकट खिड़की पर ज़्यादा सफल नहीं रही। इस फ़िल्म के बाद सुनील दत्त ने फ़िल्म ‘मुझे जीने दो’ का निर्माण किया। यह फ़िल्म डाकुओं के जीवन पर आधारित थी। यह फ़िल्म सुपरहिट साबित हुई। इसके बाद उन्होंने अपने भाई सोम दत्त को बतौर मुख्य अभिनेता फ़िल्म ‘मन का मीत’ में लांच किया। सोम दत्त का फ़िल्मी सफर बहुत सफल नहीं रहा।  सुनील दत्त ने 1971 में अपनी महत्वकांक्षी फ़िल्म ‘रेशमा और शेरा’ का निर्माण और निर्देशन किया। इस फ़िल्म में उन्होंने भूमिका भी निभाई। यह एक पीरियड और बड़े बजट की फ़िल्म थी जिसे दर्शकों ने नकार दिया। निर्माता और निर्देशक बनने के बाद भी सुनील दत्त अभिनय से कभी ज़्यादा समय के लिए दूर नहीं रहे।
सुनील दत्त की सत्तर और अस्सी के दशक में बनी फ़िल्में ‘प्राण जाए पर वचन ना जाए’ (1974), ‘नागिन’ (1976), ‘जानी दुश्मन’ (1979) और ‘शान’ (1980) में उनकी भूमिकाएँ पसंद की गयी। इस समय में सुनील दत्त धार्मिक पंजाबी फ़िल्मों से भी जुड़े रहे। जिन फ़िल्मों में ‘मन जीते जग जीते’ (1973), ‘दुख भंजन तेरा नाम’ (1974 ), ‘सत श्री अकाल’ (1977) प्रमुख हैं।
राजनीति में
सुनील दत्त ने फ़िल्मों में कई भूमिकाएँ निभाने के बाद समाज सेवा के लिए राजनीति में प्रवेश किया और कांग्रेस के सहयोग से लोकसभा के सदस्य बने। साल 1968 में वह पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किए गए। सुनील दत्त को 1982 में मुंबई का शेरिफ नियुक्त किया गया। हिन्दी फ़िल्मों के अलावा सुनील दत्त ने कई पंजाबी फ़िल्मों में भी अपने अभिनय का जलवा दिखाया। इनमें ‘मन जीते जग जीते’ 1973, ‘दुख भंजन तेरा नाम’ 1974 और ‘सत श्री अकाल’ 1977 जैसी सुपरहिट फ़िल्में शामिल है।
नर्गिस की मृत्यु
1980 में सुनील दत्त ने अपने बेटे संजय दत्त को फ़िल्म ‘रॉकी’ में लांच किया। यह एक सुपरहिट फ़िल्म साबित हुई लेकिन फ़िल्म के प्रदर्शित होने के थोड़े समय के बाद ही उनकी पत्नी नर्गिस का कैंसर की बीमारी की वजह से देहांत हो गया। नर्गिस की कैंसर से हुई मृत्यु के कारण उन्हें इस बीमारी के प्रति सामाजिक जागरूकता के प्रति बढ़ने की प्रेरणा मिली। सुनील दत्त ने पत्नी की याद में ‘नर्गिस दत्त फाउंडेशन’ की स्थापना की। यह वो समय था जब सुनील दत्त सामाजिक कार्यक्रमों में ज़्यादा दिलचस्पी लेने लगे।
सम्मान और पुरस्कार
    1963 – फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार (मुझे जीने दो)
    1965 – फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार (ख़ानदान)
    1968 – पद्मश्री
    1995 – फ़िल्मफ़ेयर लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार
    1997 – स्टार स्क्रीन लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार
    2001 – ज़ी सिने लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार
    2005 – फाल्के रत्न पुरस्कार
मृत्यु
हिन्दी फ़िल्मों के पहले एंग्री यंग मैन और राजनीतिक तौर पर एक आदर्श नेता सुनील दत्त का 25 मई, 2005 को ह्रदय गति रुकने के कारण बांद्रा स्थित उनके निवास स्थान पर देहांत हो गया। सुनील दत्त ‘मदर इंडिया’ के ‘बिरजू’ के रूप में या एक आदर्श नेता के तौर पर आज भी हमारे बीच मौज़ूद हैं।

मोहयाल संस्कृति

वही सभ्यता-संस्कृति जीवंत बनी रहती है ,जिसके नागरिक इसे सुरक्षित रखने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं.
मोहयाल समाज की संस्कृति का अस्तित्व सुरक्षित है. देश के विभिन्न अंचलों में मोहयाल सामाजिक समारोहों में मिलते हैं, विचार-विमर्श करते हैं. जनरल मोहया
ल सभा की ओर से अनेक समारोह आयोजित होते हैं. विभिन्न नगरों की मोहयाल सभाएँ वार्षिक मेले/मिलन आयोजित करती हैं. मासिक बैठकें होती हैं. इनका महत्त्व है.
इन आयोजनों के माध्यम से अपनत्व का भाव जाग्रत होता है.

Wednesday, June 5, 2013

मोहयाल मित्र जून-2013, Mohyal Mitter June -2013




मोहयाल मित्र के जून अंक में 26 मई 2013 को हुई  (Annual General Body Meeting ) वार्षिक आम सभा बैठक संबंधी फोटो प्रकाशित हुए हैं. यहाँ उन्हें दिया गया है.

Wednesday, May 29, 2013

मोहयाल सभा पश्चिम विहार का 5मई 2013 को मोहयाल मेला

वही सभ्यता-संस्कृति जीवंत बनी रहती है ,जिसके नागरिक इसे सुरक्षित रखने के लिए निरंतर प्रयासरत  रहते हैं.
मोहयाल समाज की संस्कृति का अस्तित्व सुरक्षित है. देश के विभिन्न  अंचलों में मोहयाल सामाजिक समारोहों में मिलते हैं, विचार-विमर्श करते हैं. जनरल मोहयाल सभा की ओर से अनेक समारोह आयोजित होते हैं. विभिन्न नगरों की मोहयाल सभाएँ वार्षिक मेले/मिलन आयोजित करती हैं. मासिक बैठकें होती हैं. इनका महत्त्व है.
पाँच मई को मोहयाल सभा पश्चिम विहार,नई दिल्ली का वार्षिक मेला था. इसमें मुख्य-अतिथि के रूप में भाग लिया था. इन आयोजनों के माध्यम से अपनत्व का भाव जाग्रत होता है.
-- अशोक लव
बाईं ओर का चित्र 'मोहयाल सभा पश्चिम विहार ' द्वारा आयोजित समारोह का है. (मोहयाल मित्र -जून 2013अंक  )

रायजादा बी.डी.बाली का 26 मई 2013 का स्वागत-भाषण



रायज़ादा बी.डी.बाली का स्वागत-भाषण 
---------------------------------------

जी.एम.एस. की इस वार्षिक आम-सभा-बैठक(ए.जी.एम) में आपका स्वागत करते हुए मुझे अपर हर्ष हो रहा है. आशा है कि आज होने वाली कार्यवाही सद्भाव भरी होगी और समाज के लिए लाभदायक होगी.

गत ए.जी.एम. के पश्चात जी.एम.एस. ने विभिन्न क्षेत्रों में अनेक कार्य किए, चाहे ये आर्थिक क्षेत्र में थे, वृंदावन और गोवर्धन में नए आश्रम बनाने के थे, मेरिट को आर्थिक रूप से मज़बूत करके समाज की सेवा करने के थे, विधवाओं बहनों की सहायता करने के थे,ज़रूरतमंद विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने और उच्च शिक्षा के लिए थे अथवा मेडिकल-सहायता के लिए थे.हमारे लिए यह संतोष की बाट है कि इन कार्यों की सबने बहुत प्रंशसा की है. हमारे साथ संबंद्ध लोकल मोहयाल सभाओं ने सर्वोच्च संस्था के आवश्यक अंगों की रूप में अपनी उचित भूमिका निभाई है.हम इसकी प्रशंसा करते हैं.

गत वर्षों में जी.एमएस.ने अपनी विश्वसनीयता बनाई है, जिस पर हम सब गर्व कर सकते हैं हमने विभिन्न आश्रम,भवन और इमारतें बने हैं-जैसे मोहयाल फाउन्डेशन—जो हमारी गतिविधिओं का केद्र है और भविष्य में हम स्वास्थ्य तथा शिक्षा के क्षेत्र में  कार्य करने जा रहे हैं,जो समय की मांग है. मोहयाल सभा यमुना नगर के सौजन्य से हमारे पास यमुना नगर में भ-खंड है,जिसका स्थानीय समाज के हित के लिए सदुपयोग किया जाएगा.इसी  प्रकार देहरादून में हम सफलतापूर्वक नर्सरी स्कूल चला रहे हैं.,इसके साथ-साथ हमने  हरिद्वार में प्ले स्कूल आरंभ किया है,जिसे कैम्ब्रिज के सहयोग से पिछड़े बच्चों के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मॉडल नर्सरी स्कूल में विकसित किया जाएगा. जी.एम.एस. की वर्तमान गतिविधियों में यह नया अध्याय होगा.

मैंने हमेशा कहा है कि जी.एम.एस.गत कुछ वर्षों में जी.एम.एस. की आर्थिक स्थिति मज़बूत हुई है और यह अपनी सीमाओं तथा स्रोतों के अनुसार नए क्षेत्रों में  कार्य करने में सक्षम है और समाज की सेव करने वाले नए –नए क्षेत्रों में कार्य करने वाले प्रस्तावों का स्वागत करती है.

मेरे सहकर्मी-श्री बी.एल.छिब्बर (उपाध्यक्ष) और श्री डी.वी.मोहन(महासचिव) आर्थिक रूपरेखा का विवरण प्रस्तुत करेंगे और गत कुछ वर्षों में किए कार्यों आदि की जानकारी देंगे,आशा है आप इनकी प्रशंसा और अनुमोदन करेंगे.

हमने काफी कुछ कर लिया है, जैसा कहा जाता है कि आकाश कार्य करने की सीमा होता है, अभी और बहुत कुछ प्राप्त करना शेष है. एकता और संगठन से और पूरे समाज को प्रगति तथा विकास की दिशा में अग्रसर होकर यह उपलब्धि प्राप्त की जा सकती है.हमें इस दिशा में हमेशा चलते रहना है.

अंत में मैं आपका यहाँ उपस्थित होने के लिए धन्यवाद करता हूँ और आशा करता हूँ कि आप विरासत में मिली अपनत्व की भावना से विचार-विमर्श में भाग लेंगे.

जय मोहयाल !!

बी.डी.बाली

अध्यक्ष,जी.एम.एस.

(अंग्रेज़ी से भावानुवाद--अशोक लव )

Wednesday, May 8, 2013

Youth Mohyals


Keeping Me Safe / Monica K Chibber

Keeping me safe

Monica K. Chibber
Country : USA
With standards, products are made more efficiently, with fewer risks and defects.Imagine that your company designs an innovative new medical device which has the potential to save the lives of millions. You are excited to introduce your new product to the world, but, before you can begin distributing to overseas buyers, you must comply with all the standards and regulations. You ask yourself : is this really necessary ? Why do I need more paperwork ?
Ms Monika K. ChibberI have some nine years’ experience in the pharmaceutical and medical device industry (from drips, needles and infusion pumps to dental imaging devices). I am specifically interested in quality and regulation, and I am currently a regulatory affairs specialist with a medical device manufacturer of oral fluid diagnostic and collection devices.
Further investigation changes your perspective on the new requirements and “ paperwork ”. Many standards such as ISO 14971 on risk analysis for medical devices and ISO 13485 on quality management for medical devices contain key elements for producing a safe and effective product. These standards will make sure that a doctor can use your product with confidence, and that no undue harm will befall the patient. The intended purpose of saving a person’s life will be achieved with no negative repercussions. This is where you realize that International Standards are not only necessary, they are also a blessing in disguise, which will protect the public and your company.
Every day we unknowingly utilize objects that must comply with International Standards. It is these standards that prevent useful equipment – from your cell phone to the X-ray machine at the dentist’s office – from becoming a health hazard.
Standards and regulations cover a wide array of products to ensure safety, reduce waste, and lower costs. Above all, they uphold public safety. And when public safety becomes a priority, manufactures will benefit from producing quality products.
With standards, products are made more efficiently, with fewer risks and defects, which in turn increases production and profit. International Standardsare used to create a safer environment  for everyone worldwide. They may go unnoticed in the background of our everyday lives, but it is  thanks to them that we don’t have to think twice about talking on our cell phones, microwaving our food or driving our cars.
 

Saturday, April 27, 2013

Ashok Lav and Vinod Dutt honoured --Mohyal Mitter

Dr Ashok Lav Secy GMS and Hindi Editor -Mohyal Mitter was honored  on 4th April 2013 for his literary and social work with 'Acharya Vijyendra Snatak Smriti Samman ' by Rotary Club Downtown, Ashok Vihar, New Delhi.
Shri Vinod Dutt ,President Mohyal Sabha Khanna was honoured by President of India. GMS felicitated  him on 14th April 2013.

Thursday, April 25, 2013

Acharya Vijyendra Snatak Samman to Dr Ashok Lav

Rotary Club Delhi Uptown and Shabd-Setu honoured Padmshree Swami GC Bharti renowned Kabir singer and Dr Ashok Lav well known writer and poet with ' Acharya Vijyendra Snatak Smriti Samman ' on 4th April 2013.

Wednesday, April 24, 2013

जयपुर में अशोक लव / पुलकित वैद

टीम क्लीन जयपुर के समारोह में भाग लेने के लिए श्री अशोक लव ग्यारह अप्रैल को जयपुर पहुँचे. बारह अप्रैल को सेंट ज़ेवियर्स स्कूल में आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता कार्यक्रम  में उनके साथ राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती ममता शर्मा तथा श्रीमती मीना बहादुर,श्री नंद भारद्वाज, श्री किशन रूंगटा भी निर्णायक थे. श्रीमती सुनीति शर्मा ने प्रतियोगिता का संचालन किया.





सुनील दत्ता ने अमिताभ बच्चन के साथ मनाया जन्म-दिन

सुप्रसिद्ध समाज सेवी और फ़िल्मकार श्री सुनील दत्ता का जन्म-दिन पाँच अप्रैल को भोपाल में फिल्म ' सत्याग्रह ' की शूटिंग के दौरान मनाया गया. इस अवसर पर अमिताभ  बच्चन,प्रकाश झा ,करीना कपूर आदि फ़िल्मी कलाकार, श्रीमती मंजू दत्ता और धनंजय  दत्ता उपस्थित थे. सबने सुनील दत्ता को जन्म-दिन की बधाई दी .

Wednesday, April 10, 2013

' आचार्य विजयेंद्र स्नातक स्मृति सम्मान ' साहित्यकार अशोक लव को / संजीव बाली

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ अशोक लव को 'आचार्य विजयेंद्र स्नातक स्मृति सम्मान '
हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार श्री  अशोक लव को चार अप्रैल 2013 को साहित्य और समाज सेवा के लिए  'आचार्य विजयेंद्र स्नातक स्मृति सम्मान ' प्रदान किया गया. डॉ हरीश नवल ने उन्हें शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया.डॉ रवि शर्मा ने दोनों सम्मानित महानुभावों को प्रदान किए गए प्रशस्ति-पत्रों का वाचन किया.. डॉ सुधा नवल (सुपुत्री डॉ विजयेंद्र स्नातक ) ने उन्हें ग्यारह हज़ार रुपए भेंट किए. सम्मान-समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ कमल किशोर गोयनका ने की. सुप्रसिद्ध गायक और संगीतकार श्री सतीश बब्बर मुख्य -अतिथि थे.
' शब्द-सेतु'  संस्था की ओर से यह पुरस्कार स्वर्गीय डॉ विजयेंद्र स्नातक की स्मृति में प्रति वर्ष दिया जाता है. सन 2012-2013 के लिए यह सम्मान डॉ अशोक लव और सुप्रसिद्ध कबीर गायक पद्मश्री जी सी भारती को उनकी साहित्य ,संगीत और कला के क्षेत्र में की गई सेवाओं के लिए प्रदान किया गया.
डॉ अशोक लव को समाज-सेवा के लिए ' मोहयाल श्री ' उपाधि भी प्रदान की गई. इस अवसर पर अशोक लव ने अपनी कविताएँ सुनाईं .अशोक लव की साहित्यिक और शैक्षिक लगभग सौ से  अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनकी चर्चित पुस्तकें हैं--शिखरों से आगे,सलाम दिल्ली, लड़कियाँ छूना चाहती हैं आसमान,पत्थरों से बंधें पंख,अनुभूतियों की आहटें, हिंदी के प्रतिनिधि साहित्यकारों से साक्षात्कार आदि.
पद्मश्री जी सी भारती ने अपने गायन से श्रोताओं को मंत्र-मुग्ध कर दिया.सुप्रसिद्ध व्यंगकार डॉ हरीश नवल ने कार्यक्रम का आयोजन और संचालन किया.
सम्मान समारोह का आयोजन ' रोटरी क्लब दिल्ली अपटाउन मंडल ' द्वारा सुंदर लाल जैन सभागार,अशोक विहार ,नई दिल्ली में किया गया.इस अवसर पर पत्रकार, दिल्ली विश्वविद्यालय के अनेक प्राचार्य,शिक्षाविद, साहित्यकार और कलाकार उपस्थित थे.










Thursday, February 28, 2013

अशोक लव की कविता 'बाज़ और अधिकार ' का डॉ माखन लाल दास द्वारा असमी में अनुवाद

চিলনী আৰু অধিকাৰ/ অশোক লৱ

চিলনীৰ হাতোৰাত
চৰাইৰ মঙহ দেখি
চৰাইয়ে নিদিয়ে এৰি
জুখিবলে আকাশৰ পৰিধি ৷
চৰাইবোৰ উৰি ফুৰে
মুখৰ কৰি তোলে
আকাশৰ চুক-কোণ
কলকলনিৰে |
চিলনীৰ যি ভুল ধাৰণাই নাথাকক কিয়
চৰায়ে কিন্তু নিদিয়ে এৰি
আকাশৰ ওপৰত থকা
নিজ অধিকাৰ খিনি৷
........................
अशोक लव की  कविता 'बाज़ और अधिकार ' का डॉ माखन लाल दास  द्वारा असमी में अनुवाद 
डॉ माखन लाल दास द्वार मेरी कविता --बाज़ और अधिकार
-----------------------------------
बाज़ों के पंजों में
चिड़ियों का माँस देख
नहीं छोड़ देती चिड़िया
खुले आकाश की सीमाएँ नापना .
उड़ती है चिड़िया
गुँजा देती है-
चहचहाटों से आकाश का कोना-कोना,
बाज़ चाहे जिस ग़लतफ़हमी में रहें
चिड़िया नहीं छोड़ती
आकाश पर अपना अधिकार !