Friday, January 13, 2012

लोहड़ी का गीत -सुन्दर मुंदरिये / अशोक लव

सुंदर मुंदरिये हो !
तेरा
कौन विचारा हो !
दुल्ला
भट्टी वाला हो !
दुल्ले
धी व्याही हो !
सेर शक्कर पाई हो !

कुड़ी
दे जेबे पाई
कुड़ी
दा लाल पटाका हो !
कुड़ी
दा सालू पाटा हो !
सालू
कौन समेटे हो !
चाचे चूरी कुट्टी हो !

ज़मिदारां
लुट्टी हो !
ज़मींदार
सदाए हो !
गिन
-गिन पोले लाए हो !
इक
पोला रह गया !
सिपाही
फड के लै गया !
सिपाही ने मारी ईट

भावें
रो भावें पिट
सानू
दे दे लोहड़ी

तुहाडी
बनी रवे जोड़ी !

3 comments:

buntybali said...
This comment has been removed by the author.
buntybali said...

"लोहड़ी का सुन्दर पंजाबी लोक गीत -सुन्दर-मुंदरिये"
आप का धन्यवाद ||

Ramkrishna Vajpei said...

बहुत सुन्दर बचपन की यादें ताजा हो गईं हम लोग इसमें एक लाइन तब और बोलते थे जब कोई लकड़ी नहीं देता था - हुक्के पे हुक्का ये घर भुक्खा।