Wednesday, August 18, 2010

आनंद बख्शी : अमर मोहयाल गीतकार

आनंद बख़्शी यह वह नाम है जिसके बिना आज तक बनी बहुत बड़ी-बड़ी म्यूज़िकल फ़िल्मों को शायद वह सफलता मिलती जिनको बनाने वाले आज गर्व करते हैं। आनन्द बख्शी उन नामी फिल्मी गीतकारों में से एक हैं जिन्होंने एक के बाद एक अनेक और लगातार साल दर साल बहुचर्चित और दिल लुभाने वाले यादगार गीत लिखेसुनने वाले आज भी इन गीतों को गुनगुनाते हैं, गाते हैं। जो प्रेम गीत उनकी कलम से उतरे उनके बारे में जितना कहा जाये कम हैप्यार ही ऐसा शब्द है जो उनके गीतों को परिभाषित करता हैजब उन्होंने दर्द लिखा तो सुनने वालों की आँखें छलक उठीं दिल भर आयाऐसे गीतकार थे आनन्द बक्षी।
दोस्ती
पर शोले फ़िल्म में लिखा वह गीत 'यह दोस्ती हम नहीं छोड़ेगे' आज तक कौन नहीं गाता-गुनगुनाता। ज़िन्दगी की तल्खियो को जब शब्द में पिरोया तो हर आदमी की ज़िन्दगी किसी किसी सिरे से उस गीत से जुड़ गई ।
गीत जितने सरल हैं उतनी ही सरलता से हर दिल में उतर जाते हैं, जैसे ख़ुशबू हवा में और चंदन पानी में घुल जाता है। मैं तो यह कहूँगा प्रेम शब्द को शहद से भी मीठा अगर महसूस करना हो तो आनन्द बक्षी साहब के गीत सुनिये। मजरूह सुल्तानपुरी के साथ-साथ एक आनन्द बक्षी ही ऐसे गीतकार हैं जिन्होने 43 वर्षों तक लगातार एक के बाद एक सुन्दर और ज़िंदगी से जुड़े मनमोहक गीत लिखे

21 जुलाई सन् 1930 को रावलपिण्डी में जन्मे आनंद बक्षी ने एक यही सपना देखा था कि बम्बई (मुम्बई) जाकर गायक बनना है। इसी सपने के पीछे दौड़ते-भागते वे बम्बई गएउन्होंने अजीविका के लिए 'नेवी की नौकरी कीकिसी उच्च पदाधिकारी से कहा सुनी के कारण उन्होंने वह नौकरी छोड़ दी। इसी बीच भारत-पाकिस्तान बँटवारा हुआ और वह लखनऊ में अपने घर गये। यहाँ वह टेलीफोन आपरेटर का काम कर तो रहे थे . गायक बनने का सपना उनकी आँखों से छँटा नहीं और वह एक बार फिर बम्बई को निकल पड़े।

बम्बई जाकर उन्हें ठोकरों के अलावा कुछ नहीं मिला। न जाने यह क्यों हो रहा था? पर कहते हैं न कि जो होता है भले के लिए होता है। फिर वह दिल्ली तो आ गये और EME नाम की एक कम्पनी में मोटर मकैनिक की नौकरी भी करने लगे, लेकिन दीवाने के दिल को चैन नहीं आया और फिर वह भाग्य आज़माने बम्बई लौट गये। इस बार बार उनकी मुलाक़ात भगवान दादा से हुई जो फिल्म 'बड़ा आदमी(1956)' के लिए गीतकार ढूँढ़ रहे थे और उन्होंने आनन्द बक्षी से कहा कि वह उनकी फिल्म के लिए गीत लिख दें, इसके लिए वह उनको रुपये भी देने को तैयार हैं। पर कहते हैं न बुरे समय की काली छाया आसानी से साथ नहीं छोड़ती सो उन्हें तब तक गीतकार के रूप में संघर्ष करना पड़ा जब तक सूरज प्रकाश की फिल्म 'मेहदी लगी मेरे हाथ(1962)' और 'जब-जब फूल खिले(1965)' पर्दे पर नहीं आयी। अब भाग्य ने उनका साथ देना शुरु कर दिया था या यूँ कहिए उनकी मेहनत रंग ला रही थी और 'परदेसियों से न अँखियाँ मिलाना' और 'यह समा है प्यार का' जैसे लाजवाब गीतों ने उन्हें बहुत लोकप्रिय बना दिया। इसके बाद फ़िल्म 'मिलन(1967)' में उन्होंने जो गीत लिखे, उसके बाद तो वह गीतकारों की श्रेणी में सबसे ऊपर आ गये। अब 'सावन का महीना', 'बोल गोरी बोल', 'राम करे ऐसा हो जाये', 'मैं तो दीवाना' और 'हम-तुम युग-युग' यह गीत देश के घर-घर में गुनगुनाये जा रहे थे। इसके बाद आनन्द बक्षी आगे ही आगे बढ़ते गये, उन्हें फिर कभी पीछे मुड़ के देखने की ज़रूरत नहीं पड़ी।

यह सुनहरा दौर था जब गीतकार आनन्द बक्षी ने संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ काम करते हुए 'फ़र्ज़(1967)', 'दो रास्ते(1969)', 'बॉबी(1973'), 'अमर अकबर एन्थॉनी(1977)', 'इक दूजे के लिए(1981)' और राहुल देव बर्मन के साथ 'कटी पतंग(1970)', 'अमर प्रेम(1971)', हरे रामा हरे कृष्णा(1971' और 'लव स्टोरी(1981)' फ़िल्मों में अमर गीत दिये। फ़िल्म अमर प्रेम(1971) के 'बड़ा नटखट है किशन कन्हैया', 'कुछ तो लोग कहेंगे', 'ये क्या हुआ', और 'रैना बीती जाये' जैसे उत्कृष्ट गीत हर दिल में धड़कते हैं और सुनने वाले के दिल की सदा में बसते हैं। अगर फ़िल्म निर्माताओं के साक्षेप चर्चा की जाये तो राज कपूर के लिए 'बॉबी(1973)', 'सत्यम् शिवम् सुन्दरम्(1978)'; सुभाष घई के लिए 'कर्ज़(1980)', 'हीरो(1983)', 'कर्मा(1986)', 'राम-लखन(1989)', 'सौदागर(1991)', 'खलनायक(1993)', 'ताल(1999)' और 'यादें(2001)'; और यश चोपड़ा के लिए 'चाँदनी(1989)', 'लम्हे(1991)', 'डर(1993)', 'दिल तो पागल है(1997)'; आदित्य चोपड़ा के लिए 'दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे(1995)', 'मोहब्बतें(2000)' फिल्मों में सदाबहार गीत लिखे।

बक्षी साहब ने फ़िल्म मोम की 'गुड़िया(1972)' में गीत 'बाग़ों में बहार आयी' लता जी के साथ गाया था। इस पर लता जी बताती हैं कि 'मुझे याद है कि इस गीत की रिकार्डिंग से पहले आनन्द मुझसे मिलने आये और कहा कि मैं यह गीत तुम्हारे साथ गाने जा रहा हूँ 'इसकी सफलता तो सुनिश्चित है'। इसके अलावा 'शोले(1975)', 'महाचोर(1976)', 'चरस(1976)', 'विधाता(1982)' और 'जान(1996)' में भी पाश्र्व(प्लेबैक) गायक रहे। आनन्द साहब का फिल्म जगत में योगदान यहीं तक सीमित नहीं, 'शहंशाह(1988)', 'प्रेम प्रतिज्ञा(1989)', 'मैं खिलाड़ी तू आनाड़ी(1994)', और 'आरज़ू(1999)' में बतौर एक्शन डायरेक्टर भी काम किया, सिर्फ यही नहीं 'पिकनिक(1966)' में अदाकारी भी की।

बक्षी की गीतों की महानता इस बात में है कि वह जो गीत लिखते थे वह किसी गाँव के किसान और शहर में रहने वाले किसी बुद्धिजीवी और ऊँची सोच रखने वाले व्यक्तिव को समान रूप से समझ आते हैं। वह कुछ ऐसे चुनिंदा गीतकारों में से एक हैं जिनके गीत जैसे उन्होंने लिखकर दिये वह बिना किसी फेर-बदल या नुक्ताचीनी के रिकार्ड किये गये। आनन्द साहब कहते थे फिल्म के गीत उसकी कथा, पटकथा और परिस्थिति पर निर्भर करते हैं। गीत किसी भी मन: स्थिति, परिवेश या उम्र के लिए हो सकता है सो कहानी चाहे 60, 70 या आज के दशक की हो इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है।

आनन्द साहब को बड़े-बड़े पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिसमें 'आदमी मुसाफ़िर है' [अपनापन(1977)], 'तेरे मेरे बीच कैसा है यह बन्धन' [ एक दूजे के लिए(1981)], 'तुझे देखा तो यह जाना सनम' [दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे (1995)] और 'इश्क़ बिना क्या जीना यारों' [ ताल(1999)] गीतों के लिए चार बार फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार भी सम्मिलित है।

बक्षी साहब का निधन 30 मार्च 2002 को मुम्बई में हुआ। फेफड़े और दिल की बीमारी को लेकर नानावती हास्पिटल में उनका इलाज काफ़ी समय चला लेकिन उनको बचाने की कोशिश नाकामयब रही। आनन्द बक्षी सा आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी कमी सिर्फ़ हमें नहीं खलती बल्कि उन फिल्मकारों को भी खलती है जिनके लिए वह गीत लिखते रहे, आज अगर आप उनकी आने वाली फ़िल्मों के गीत सुने तो कहीं न कहीं उनमें प्यार की मासूमियत और सच्ची भावना की कमी झलकती है, या बनावटीपन है या उनके जैसा लिखने की कोशिश है। आनन्द साहब इस दुनिया से क्या रुख़्सत हुए जैसे शब्दों ने मौन धारण कर लिया, जाने यह चुप्पी कब टूटे कब कोई दूसरा उनके जैसा गीतकार जन्म ले!

Monday, August 16, 2010

श्री धन राज छिब्बर का निधन

जनरल मोहयाल सभा के पूर्व जनरल सेक्रेटरी श्री धन राज छिब्बर जी का निधन 15 अगस्त 2010 को उनके निवास इन्द्रपुरी ,नई दिल्ली मे हो गया। उनका दाह-संस्कार 16 अगस्त को हुआ।
वर्तमान में वे जनरल मोहयाल सभा के वैवाहिक-संबंधों के कार्य देख रहे थे। वे कुछ महीनों से अस्वस्थ थे।
' जनरल मोहयाल सभा ' , 'जय मोहयाल' परिवार और समस्त मोहयाल समाज की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि !

Saturday, August 14, 2010

डॉ भाई महावीर का अनुरोध

13 अगस्त 2010
मेरे प्रिय भाइयो और बहनो,
' जनरल मोहयाल सभा ' ने पिछले कुछ वर्षों में पूरी बिरादरी के लिए जो काम किए हैं उनसे पूरी बिरादरी का नाम रोशन हुआ है। ' मोहयाल मित्र' के जुलाई अंक में मोहयाल आश्रम हरिद्वार के मोहयाल मंदिर में मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा की रिपोर्ट पढ़कर बहुत खुशी हुई। पूरे फंक्शन के फोटोग्राफ देखे। हमारी बिरादरी के इतिहास में एक और गोल्डन पेज जुड़ गया है। इसका पूरा श्रेय वर्तमान मैनेजिंग कमेटी के सदस्यों और रायज़ादा बी डी बाली की दूरदर्शिता को जाता है।
मोहयाल आश्रम हरिद्वार मोहयालों की शान बन गया है। यहाँ जो एक बार जाता है तब महसूस करता है कि 'जनरल मोहयाल सभा ' की वर्तमान मैनेजिंग कमेटी ने पूरी बिरादरी को कितना खूबसूरत तोहफा भेंट किया है।
यह जानकार और खुशी हुई कि सन् 2011 के आरम्भ में वृंदावन का मोहयाल आश्रम भी बन जाएगा। राधा-कृष्ण की पुण्य भूमि पर मोहयाल आश्रम बनाने का फैसला करके रायज़ादा बी डी बाली और उनकी टीम ने पुण्य तो कमाया ही है पूरी बिरादरी का नाम वृंदावन के इतिहास में लिखवा दिया है। आशा है यह आश्रम भी हरिद्वार आश्रम की तरह खूबसूरत बनेगा।
इन आश्रमों के लिया,लंगर-फंड के लिए,ट्रस्टों के लिए बढ़-चढ़कर धन दे रहे हैं। पता चला है कि मोहयाल आश्रम वृंदावन में कमरे बनवाने के लिए मोहयालों में धनराशि देने की होड़ लग गई है। लोकल सभाएँ भी इक्यावन -इक्यावन हज़ार रुपए दे रही हैं। आश्रम अभी बना नहीं है और मोहयाल लंगर- फंड के लिए ग्यारह -ग्यारह हज़ार रुपए दे रहे हैं।
इससे पता चलता है कि वर्तमान मैनेजिंग कमेटी और प्रेजिडेंट रायजादा बी डी बाली पर पूरी बिरादरी कितना विश्वास करती है और उनका समर्थन करती है। ऐसा स्वाभाविक भी है क्योंकि पिछले लगभग दस-बारह सालों में जो काम हुए हैं वैसे काम इससे पहले कभी नहीं हुए। क़ुतुब इंस्टीट्यूशनल एरिया दक्षिणी दिल्ली का सबसे महँगा एरिया है। यहाँ ' मोहयाल फौन्डेशन ' में जी एम एस सेक्रेटेरिएट है। इतनी शानदार बिल्डिंग देखकर मन खुश हो जाता है। टेक्नीकल और कंप्यूटर की एजुकेशन के लिए चलाया जा रहा ' मेरिट' इंस्टिट्यूट नए वक्त की ज़रुरत थी जिसे जी एम एस के मैनेजिंग कमेटी ने महसूस किया और इसकी शुरूआत की। नई दिल्ली के इन्द्रपुरी के मोहयाल भवन ने नया रूप ले लिया है। यहाँ बाहर से आने वाले मोहयालों के लिए गेस्ट हाऊस और शादी -ब्याह के लिए हॉल बना हुआ है।
यह जानकार खुशी होती है कि जनरल मोहयाल सभा की वर्तमान मैनेजिंग कमेटी लगातार नए -नए प्रोजेक्ट हाथ में लेती रही है और उन्हें पूरी बिरादरी के सहयोग से पूरा करती रही है। ' मोहयाल मित्तर' का हर महीने लगातार छपता है। बिरादरी की ख़बरों को एक-दूसरे तक पहुँचाने का यह सबसे लोकप्रिय साधन है। 'मोहयाल मित्र' लगातार नया रूप लेता जा रहा है। इसके द्वारा लोकल सभाओं के कामों और योजनाओं की जानकारी मिलती रहती है। 'मोहयाल मित्र'बिरादरी की धड़कन है।
..जारी

स्वतंत्रता-दिवस की शुभकामनाएँ !

स्वतंत्रता
दिवस
की

शुभकामनाएँ
!

Friday, August 13, 2010

Support Rzd BD Bali ji & his Team

Those who can today misuse the name of Mohyal Ratna Rzd BD Bali or the names of his proposed team
can tomorrow misuse the Assests of Mohyal Community.
Vote and support credible leadership of Mohyal Ratna Rzd BD Bali jee and his team.

---FROM: Well Wishers and committed Mohyal soldiers.
In the interest of the community.
Jai Mohyal!

Vote and support Rzd BD Bali & His Team


We support Rzd BD Bali jee and His Team.Please Vote all 40 members of His team.

--Gaurav Mohan ( Secretary Mohyal Sabha Canada)

Shri Gaurav Mohan with his wife and daughter.
(Picnic-July 2010,Toronto)

Thursday, August 12, 2010

Ashok Lav's Appeal to Mohyals

Vote Rzd BD Bali And His Team
Dear
Mohyal Brothers and Sisters
General Mohyal Sabha has achieved a lot under the able and dynamic leadership of Rzd BD Bali. I am associated with GMS for the last about 26 years. Now we have Mohyal Ashram and Mohyal Seva Sadan ( Old Age Home) at Haridwar , Mohyal Foundation at Qutab Institutional Area ,New Delhi.Mohyal Ashram at Vrindavan is under construction.Mohyal Bhawan at Inderpuri ,New Delhi is renovated. Monthly Pension to Widows has been increased and lots of other projects are implemented now. These are achieved with the support of whole community. I have seen these developments very closely. It is requested to give your support and vote to the dedicated mohyals so that progress and development of the community must go on. Rzd BD Bali has selected a very dedicated team.Please vote for them.
Yours brotherly

Ashok
Lav
New Delhi-110075

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list of candidates

1.RZD BD BALI, NEW DELHI- Voter's Serial No-0195
2.MR OP MOHAN, FARIDABAD - Voter's Serial No-0907
3.MR BL CHHIBBER ,IRS, NEW DELHI- Voter's Serial No-0059
4.CH.GL DATTA JOSH, NEW DELHI- Voter's Serial No-0090
5.MR DV MOHAN ,IFS RTD, NEW DELHI- Voter's Serial No-0012
6.DR.RATTAN KR DATTA, NEW DELHI- Voter's Serial No-0135
7.MR PK DATTA, GURGAON-Voter's Serial No-0965
8.MR VINOD DUTT, KHANNA-Voter's Serial No-1328
9.RZD JC BALI, NEW DELHI-Voter's Serial No-0320
10.DR ASHOK LAV, NEW DELHI -Voter's Serial No-0459

11.MR SUSHIL KUMAR CHHIBBER, NEW DELHI-Voter's Serial No-0323
12.MR ASHWANI KUMAR BALI, NEW DELHI-Voter's Serial No-0197
13.MR YOGESH MEHTA, NEW DELHI-Voter's Serial No-0248
14.MR PUSHP BALI, JALANDHAR-Voter's Serial No-1291
15.MR VIPIN MOHAN, YAMUNANAGAR-Voter's Serial No-1165
16.MR VINOD MEHTA, YAMUNANAGAR-Voter's Serial No-1160
17.MR ASHWANI BAKSHI, AMBALA-Voter's Serial No-0668
18.MR RIT MOHAN, PANIPAT-Voter's Serial No-1091
19.MR RAMESH DATTA, FARIDABAD-Voter's Serial No-0873
20.MR NL BAKSHI (IAS RTD), JAMMU -Voter's Serial No-1184

21.COL(RTD) SK VAID, MEERUT-Voter's Serial No-1429
22.MR KAMRAN DATTA, AGRA-Voter's Serial No-1376
23.MR OP MOHAN , NEW DELHI-Voter's Serial No-0495
24.MR DILIP SINGH DATTA, NEW DELHI-Voter's Serial No-0544
25.MR ASHOK CHHIBBER,NEW DELHI-Voter's Serial No-0204
26.MR KN MOHAN, NEW DELHI-Voter's Serial No-0373
27.MR KG MOHAN, NEW DELHI-Voter's Serial No-0119
28.MR VARINDER PAL S.BALI,BARARA(AMBALA)-Voter's Serial No-0609
29.MR ANIL DATTA, AMRITSAR-Voter's Serial No-1269
30.MR MUNISH BALI, LUDHIANA-Voter's Serial No-1331

31.MR PANKAJ BALI, AMBALA-Voter's Serial No-0680
32MR SUNIL DUTT, NEW DELHI-Voter's Serial No-0379
33.MR HARSH DATTA, NEW DELHI-Voter's Serial No-0280
34.MR VIJAYANT BALI, HOSHIARPUR-Voter's Serial No-1278
35.MR PAWAN BALI, JALANDHAR-Voter's Serial No-1309
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LADIES
36.SMT AMBA BALI,NEW DELHI-Voter's Serial No-0159
37.SMT VEENA CHHIBBER,AMBALA-Voter's Serial No-0698
38.SMT KRISHAN LATA CHHIBBER,NEW DELHI-Voter's Serial No-0322
39.SMT SUNITA MEHTA,NEW DELHI-Voter's Serial No-0112
40.SMT VANDANA VAID,KURUKSHETRA-Voter's Serial No-1052

' MOHYALS '--No.1Group on Facebook

Major Daman Dutta is serving the Mohyal community by uniting mohyals on Facebook. In a very short time 213 mohyals becomes members of this forum.
Our best wishes are with him.
फेसबुक पर 'MOHYALS ' ग्रुप के 213 सदस्य बन गए हैं इस तरह यह मोहयालों का सबसे बड़ा ग्रुप बन गया है। इसका श्रेय मेजर दमन दत्ता ( रिटायर्ड ) को जाता है। उन्होंने फेसबुक के मोहयालों को एक मंच प्रदान किया है। उनके समर्पण भाव से कार्य करने की हम प्रशंसा करते हैं।
' जय मोहयाल ' परिवार की ओर से बधाई !

Wednesday, August 11, 2010

Appeal toVoters, GMS Elections:Choudhari Anil Dutta

A sincere request and appeal to the voters for GMS elections, to be wise enough to vote Rzd Sh. B. D. Bali ji and his selected team of dedicated Mohyals, who wish to do better for the community and uplift the down trodden members of the biradari. General Mohyal Sabha has achieved a lot under the able and thoughtful leadership of Sh. B.D. Bali. I am actively associated with GMS for the last about 4-5 years, after a gap of about 25 years, Amritsar Mohyal Sabha was revived under the able guidance of the President GMS. I have seen a lot many developments by GMS towards the betterment of the biradari. Monthly Pension to Widows has been increased, student supports paid, destitute given monetary help or medical assistance to the needy and lots of other projects are under way now. These could not be achieved without active support of whole community. It is, therefore, requested to give your support and vote to the dedicated mohyals, for the progress and development of the community. Rzd BD Bali has selected a very dedicated team.
Please vote for them.

Regards
Sincerly

anil passport size2 (1).jpgChoudari Anil Dutta
(Senior Vice President)
Mohyal Sabha,Amritsar

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फरीदाबाद के मोहयाल जी एम एस के चुनावों में रायजादा बी डी बाली औरउनकी टीम का समर्थन करते हैं।
--सुमीत मेहता भीमवाल

श्री बी डी बाली जी और उनकी टीम को वोट दें

आपके माध्यम से सभी मोहयाल भाइयों से अनुरोध है कि इस चुनाव में श्री बी डी बाली जी का पूर्ण समर्थन कर जी एम एस की कार्य प्रगति में अपना योगदान दें।
जय मोहयाल !
*लाल मेहता (देहरादून)

Please Vote and Support Sh. B.D.Bali


We are proud of Sh. B.D.BALI. His dedications for MOHYALS are appreciable.
Please vote and support him and his team.
Mohan Dutta ( Ex.President MS Amritsar )SAINT.PETERSBURG RUSSIA

Tuesday, August 10, 2010

Rzd BD Bali's Message to Mohyals: GMS Elections


Please support and vote these candidates
1.RZD BD BALI, NEW DELHI- Voter's Serial No-0195
2.MR OP MOHAN, FARIDABAD - Voter's Serial No-0907
3.MR BL CHHIBBER ,IRS, NEW DELHI- Voter's Serial No-0059
4.CH.GL DATTA JOSH, NEW DELHI- Voter's Serial No-0090
5.MR DV MOHAN ,IFS RTD, NEW DELHI- Voter's Serial No-0012
6.DR.RATTAN KR DATTA, NEW DELHI- Voter's Serial No-0135
7.MR PK DATTA, GURGAON-Voter's Serial No-0965
8.MR VINOD DUTT, KHANNA-Voter's Serial No-1328
9.RZD JC BALI, NEW DELHI-Voter's Serial No-0320
10.DR ASHOK LAV, NEW DELHI -Voter's Serial No-0459
11.MR SUSHIL KUMAR CHHIBBER, NEW DELHI-Voter's Serial No-0323
12.MR ASHWANI KUMAR BALI, NEW DELHI-Voter's Serial No-0197
13.MR YOGESH MEHTA, NEW DELHI-Voter's Serial No-0248
14.MR PUSHP BALI, JALANDHAR-Voter's Serial No-1291
15.MR VIPIN MOHAN, YAMUNANAGAR-Voter's Serial No-1165
16.MR VINOD MEHTA, YAMUNANAGAR-Voter's Serial No-1160
17.MR ASHWANI BAKSHI, AMBALA-Voter's Serial No-0668
18.MR RIT MOHAN, PANIPAT-Voter's Serial No-1091
19.MR RAMESH DATTA, FARIDABAD-Voter's Serial No-0873
20.MR NL BAKSHI (IAS RTD), JAMMU -Voter's Serial No-1184
21.COL(RTD) SK VAID, MEERUT-Voter's Serial No-1429
22.MR KAMRAN DATTA, AGRA-Voter's Serial No-1376
23.MR OP MOHAN , NEW DELHI-Voter's Serial No-0495
24.MR DILIP SINGH DATTA, NEW DELHI-Voter's Serial No-0544
25.MR ASHOK CHHIBBER,NEW DELHI-Voter's Serial No-0204
26.MR KN MOHAN, NEW DELHI-Voter's Serial No-0373
27.MR KG MOHAN, NEW DELHI-Voter's Serial No-0119
28.MR VARINDER PAL S.BALI,BARARA(AMBALA)-Voter's Serial No-0609
29.MR ANIL DATTA, AMRITSAR-Voter's Serial No-1269
30.MR MUNISH BALI, LUDHIANA-Voter's Serial No-1331
31.MR PANKAJ BALI, AMBALA-Voter's Serial No-0680
32MR SUNIL DUTT, NEW DELHI-Voter's Serial No-0379
33.MR HARSH DATTA, NEW DELHI-Voter's Serial No-0280
34.MR VIJAYANT BALI, HOSHIARPUR-Voter's Serial No-1278
35.MR PAWAN BALI, JALANDHAR-Voter's Serial No-1309
''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''
LADIES

36.SMT AMBA BALI,NEW DELHI-Voter's Serial No-0159
37.SMT VEENA CHHIBBER,AMBALA-Voter's Serial No-0698
38.SMT KRISHAN LATA CHHIBBER,NEW DELHI-Voter's Serial No-0322
39.SMT SUNITA MEHTA,NEW DELHI-Voter's Serial No-0112
40.SMT VANDANA VAID,KURUKSHETRA-Voter's Serial No-1052

Sunday, August 8, 2010

GMS Elections :A Response From America

Kim Chibber
This is in response to the appeal of Rzd B.D. Bali. Mohyals abroad are very impressed to see the work of the GMS in India. And with the upcoming elections we have to keep in mind the core values that build the foundation of Mohyals. This... includes credibility, honesty and willingness to help others. We should strive to maintain our focus on the welfare of human beings all over the world.

Best Wishes Always! Jai Mohyal!
FROM -- FACEBOOK

'''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''Reply
Ashok Lav Kim Chibber jee , you rightly observed.General Mohyal Sabha has achieved a lot under the presidentship of Rzd BD Bali.I am associated with GMS for the last about 24 years.There was a tin-shed office at Inderpuri,New Delhi.Now we have a beautifu...l Mohyal Ashram and Mohyal Seva Sadan(Old Age Home)at Haridwar ,Mohyal Ashram at Vrindavan (under construction), Mohyal Foundation (Fully Airconditioned ) building at Qutab Institutional Are,New Delhi,Mohyal Bhawan (Guest House) at Inderpuri,New Delhi and given grantsin lakhs to Local Mohyal Sabhas to built there Mohyal Bhavans.It's a long journey.
You rightly said--"And with the upcoming elections we have to keep in mind the core values that build the foundation of Mohyals. This... includes credibility, honesty and willingness to help others."
Thanks ! Jai Mohyal!

Saturday, August 7, 2010

Vote to Dedicated Mohyals

"कृपया अपना समर्थन और वोट देकर हमारी टीम को 'जनरल मोहयाल सभा' के चुनावों में विजयी बनाएँ"-रायजादा बी डी बाली

1.RZD BD BALI, NEW DELHI- Voter's Serial No-0195
2.MR OP MOHAN, FARIDABAD - Voter's Serial No-0907
3.MR BL CHHIBBER ,IRS, NEW DELHI- Voter's Serial No-0059
4.CH.GL DATTA JOSH, NEW DELHI- Voter's Serial No-0090
5.MR DV MOHAN ,IFS RTD, NEW DELHI- Voter's Serial No-0012
6.DR.RATTAN KR DATTA, NEW DELHI- Voter's Serial No-0135
7.MR PK DATTA, GURGAON-Voter's Serial No-0965
8.MR VINOD DUTT, KHANNA-Voter's Serial No-1328
9.RZD JC BALI, NEW DELHI-Voter's Serial No-0320
10.DR ASHOK LAV, NEW DELHI -Voter's Serial No-0459

11.MR SUSHIL KUMAR CHHIBBER, NEW DELHI-Voter's Serial No-0323
12.MR ASHWANI KUMAR BALI, NEW DELHI-Voter's Serial No-0197
13.MR YOGESH MEHTA, NEW DELHI-Voter's Serial No-0248
14.MR PUSHP BALI, JALANDHAR-Voter's Serial No-1291
15.MR VIPIN MOHAN, YAMUNANAGAR-Voter's Serial No-1165
16.MR VINOD MEHTA, YAMUNANAGAR-Voter's Serial No-1160
17.MR ASHWANI BAKSHI, AMBALA-Voter's Serial No-0668
18.MR RIT MOHAN, PANIPAT-Voter's Serial No-1091
19.MR RAMESH DATTA, FARIDABAD-Voter's Serial No-0873
20.MR NL BAKSHI (IAS RTD), JAMMU -Voter's Serial No-1184

21.COL(RTD) SK VAID, MEERUT-Voter's Serial No-1429
22.MR KAMRAN DATTA, AGRA-Voter's Serial No-1376
23.MR OP MOHAN , NEW DELHI-Voter's Serial No-0495
24.MR DILIP SINGH DATTA, NEW DELHI-Voter's Serial No-0544
25.MR ASHOK CHHIBBER,NEW DELHI-Voter's Serial No-0204
26.MR KN MOHAN, NEW DELHI-Voter's Serial No-0373
27.MR KG MOHAN, NEW DELHI-Voter's Serial No-0119
28.MR VARINDER PAL S.BALI,BARARA(AMBALA)-Voter's Serial No-0609
29.MR ANIL DATTA, AMRITSAR-Voter's Serial No-1269
30.MR MUNISH BALI, LUDHIANA-Voter's Serial No-1331

31.MR PANKAJ BALI, AMBALA-Voter's Serial No-0680
32MR SUNIL DUTT, NEW DELHI-Voter's Serial No-0379
33.MR HARSH DATTA, NEW DELHI-Voter's Serial No-0280
34.MR VIJAYANT BALI, HOSHIARPUR-Voter's Serial No-1278
35.MR PAWAN BALI, JALANDHAR-Voter's Serial No-1309
''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''
LADIES
36.SMT AMBA BALI,NEW DELHI-Voter's Serial No-0159
37.SMT VEENA CHHIBBER,AMBALA-Voter's Serial No-0698
38.SMT KRISHAN LATA CHHIBBER,NEW DELHI-Voter's Serial No-0322
39.SMT SUNITA MEHTA,NEW DELHI-Voter's Serial No-0112
40.SMT VANDANA VAID,KURUKSHETRA-Voter's Serial No-1052

Congrats :HAPPY BIRTHDAY



My Son PAARTH DUTTA's Birthday was on 1st August 2010 and my wife- Vandana Dutta's Birthday was on same date(1st August)


Anil Dutta
(Senior Vice President)
Mohyal Sabha Amritsar

Choudhary Anil Dutta ELECTED

Amritsar Development Committee elected Choudhary Anil Dutta (Senior Vice President- MS Amritsar) S/o Choudhary Mohan Dutta, as President unopposed and unanimously for consecutive 6th year, he was also re-elected as member-Solid Waste Management Project of Municipal Corporation, Amritsar. Services of Choudhary Anil Dutta towards the community and the city of Amritsar were highly appreciated by the present. We all congratulate him and wish him good luck for his future.

Smt. Vandana Dutta (In-charge Matrimonial Cell-MS Amritsar)



Congrats from Jay Mohyal family.

Wednesday, August 4, 2010

India calling: US job fair 2010

India undoubtedly is back on a high growth trajectory. In the last couple of years, it has emerged as a dominant player in the global economy with many multinationals investing into the sub-continent. Employers in India, world's second fastest growing economy, are leading the Asia-Pacific job market to meet their ever growing requirement for best possible talent globally. Indian firms have become increasingly competitive in international markets. With robust growth, more than 60% of Indian companies are on a hiring spree trying to lure the best of talent at most competitive salaries. As a result, India's heated economy is becoming lucrative for Indians in the western countries, a large chunk of who seem to already be thinking about a potential move back to India. To help more home-bound NRIs realize their aspiration of a job in India, Shine.com is organizing a two-day Job Fair each at New Jersey and Santa Clara which will bring recruiters from India and potential NRIs across the table for hiring. While similar job fairs have taken place before the recessionary pressures hit the world economy, this fair is the first since the markets recovered. The job fair is aptly titled India Calling - named so because of reverse migration as a trend picking up and many NRIs settled abroad realizing that the true calling of their career is back home again. As many as 60,000 Indian professionals working and settled abroad returned to India last year from the US. Shine's India Calling - US Job Fair 2010 will be an opportunity for experienced professionals working in the US to choose suitable assignments in India in the field of IT, R&D, Finance, Infrastructure, Retail and Business Development. With India and China recovering faster as economies while recessionary trails are still left over in the western ones, the job fair in US is slated to attract large sections of Indian population there. For recruiters it will be a great opportunity to bring home high quality talent and some big names like Amazon, RBS, Cap Gemini, IBM and Akamai have already lined up to participate in this event. Most of the recruiters are offering middle to senior level management profile and intend to hire NRIs in US for positions based out of top metros - Delhi, Mumbai, Bangalore, Hyderabad and Chennai. The job fair is scheduled to take place at the Raritan Center in New Jersey on August 28 and 29 and at the Santa Clara Convention Center on September 3 and 4, 2010. This job fair will also provide an opportunity for NRIs to meet up with real estate consultants representatives from major educational institutes in India to facilitate relocation and ironing out procedures for their children's education needs back home. India Calling looks like an event well packaged to provide a complete career shift and relocation platform for NRIs.

Friday, July 30, 2010

Love Me...

हिन्दू धर्म के संस्कार

सनातन धर्म के संस्कार सनातन अथवा हिन्दू धर्म">हिन्दू धर्म की संस्कृति संस्कारों पर ही आधारित है। हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव जीवन को पवित्र एवं मर्यादित बनाने के लिये संस्कारों का अविष्कार किया।धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक दृष्टि से भी इन संस्कारों का हमारे जीवन में विशेष महत्व है। भारतीय संस्कृति की महानता में इन संस्कारों का महती योगदान है। प्राचीन काल में हमारा प्रत्येक कार्य संस्कार से आरम्भ होता था। उस समय संस्कारों की संख्या भी लगभग चालीस थी। जैसे-जैसे समय बदलता गया तथा व्यस्तता बढती गई तो कुछ संस्कार स्वत: विलुप्त हो गये। इस प्रकार समयानुसार संशोधित होकर संस्कारों की संख्या निर्धारित होती गई। गौतम स्मृति में चालीस प्रकार के संस्कारों का उल्लेख है। महर्षि अंगिरा ने इनका अंतर्भाव पच्चीस संस्कारों में किया। व्यास स्मृति में सोलह संस्कारों का वर्णन हुआ है। हमारे धर्मशास्त्रों में भी मुख्य रूप से सोलह संस्कारों की व्याख्या की गई है। इनमें पहला गर्भाधान संस्कार और मृत्यु के उपरांत अंत्येष्टि अंतिम संस्कार है। गर्भाधान के बाद पुंसवन, सीमन्तोन्नयन, जातकर्म, नामकरण ये सभी संस्कार नवजात का दैवी जगत् से संबंध स्थापना के लिये किये जाते हैं। नामकरण के बाद चूडाकर्म और यज्ञोपवीत संस्कार होता है। इसके बाद विवाह संस्कार होता है। यह गृहस्थ जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्कार है। हिन्दू धर्म में स्त्री और पुरुष दोनों के लिये यह सबसे बडा संस्कार है, जो जन्म-जन्मान्तर का होता है। विभिन्न धर्मग्रंथों में संस्कारों के क्रम में थोडा-बहुत अन्तर है, लेकिन प्रचलित संस्कारों के क्रम में गर्भाधान, पुंसवन, सीमन्तोन्नयन, जातकर्म, नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राशन, चूडाकर्म, विद्यारंभ, कर्णवेध, यज्ञोपवीत, वेदारम्भ, केशान्त, समावर्तन, विवाह तथा अन्त्येष्टि ही मान्य है। गर्भाधान से विद्यारंभ तक के संस्कारों को गर्भ संस्कार भी कहते हैं। इनमें पहले तीन (गर्भाधान, पुंसवन, सीमन्तोन्नयन) को अन्तर्गर्भ संस्कार तथा इसके बाद के छह संस्कारों को बहिर्गर्भ संस्कार कहते हैं।
गर्भ संस्कार को दोष मार्जन अथवा शोधक संस्कार भी कहा जाता है। दोष मार्जन संस्कार का तात्पर्य यह है कि शिशु के पूर्व जन्मों से आये धर्म एवं कर्म से सम्बन्धित दोषों तथा गर्भ में आई विकृतियों के मार्जन के लिये संस्कार किये जाते हैं। बाद वाले छह संस्कारों को गुणाधान संस्कार कहा जाता है। दोष मार्जन के बाद मनुष्य के सुप्त गुणों की अभिवृद्धि के लिये ये संस्कार किये जाते हैं। हमारे मनीषियों ने हमें सुसंस्कृत तथा सामाजिक बनाने के लिये अपने अथक प्रयासों और शोधों के बल पर ये संस्कार स्थापित किये हैं। इन्हीं संस्कारों के कारण भारतीय संस्कृति अद्वितीय है। हालांकि हाल के कुछ वर्षो में आपाधापी की जिंदगी और अतिव्यस्तता के कारण सनातन धर्मावलम्बी अब इन मूल्यों को भुलाने लगे हैं और इसके परिणाम भी चारित्रिक गिरावट, संवेदनहीनता, असामाजिकता और गुरुजनों की अवज्ञा या अनुशासनहीनता के रूप में हमारे सामने आने लगे हैं। समय के अनुसार बदलाव जरूरी है लेकिन हमारे मनीषियों द्वारा स्थापित मूलभूत सिद्धांतों को नकारना कभीश्रेयस्कर नहीं
सीमन्तोन्नयन सीमन्तोन्नयन को सीमन्तकरण अथवा सीमन्त संस्कार भी कहते हैं। सीमन्तोन्नयन का अभिप्राय है सौभाग्य संपन्न होना। गर्भपात रोकने के साथ-साथ गर्भस्थ शिशु एवं उसकी माता की रक्षा करना भी इस संस्कार का मुख्य उद्देश्य है। इस संस्कार के माध्यम से गर्भिणी स्त्री का मन प्रसन्न रखने के लिये सौभाग्यवती स्त्रियां गर्भवती की मांग भरती हैं। यह संस्कार गर्भ धारण के छठे अथवा आठवें महीने में होता है। जातकर्म नवजात शिशु के नालच्छेदन से पूर्व इस संस्कार को करने का विधान है। इस दैवी जगत् से प्रत्यक्ष सम्पर्क में आनेवाले बालक को मेधा, बल एवं दीर्घायु के लिये स्वर्ण खण्ड से मधु एवं घृत वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ चटाया जाता है। यह संस्कार विशेष मन्त्रों एवं विधि से किया जाता है। दो बूंद घी तथा छह बूंद शहद का सम्मिश्रण अभिमंत्रित कर चटाने के बाद पिता यज्ञ करता है तथा नौ मन्त्रों का विशेष रूप से उच्चारण के बाद बालक के बुद्धिमान, बलवान, स्वस्थ एवं दीर्घजीवी होने की प्रार्थना करता है। इसके बाद माता बालक को स्तनपान कराती है।
नामकरण जन्म के ग्यारहवें दिन यह संस्कार होता है। हमारे धर्माचार्यो ने जन्म के दस दिन तक अशौच (सूतक) माना है। इसलिये यह संस्कार ग्यारहवें दिन करने का विधान है। महर्षि याज्ञवल्क्य का भी यही मत है, लेकिन अनेक कर्मकाण्डी विद्वान इस संस्कार को शुभ नक्षत्र अथवा शुभ दिन में करना उचित मानते हैं। नामकरण संस्कार का सनातन धर्म में अधिक महत्व है। हमारे मनीषियों ने नाम का प्रभाव इसलिये भी अधिक बताया है क्योंकि यह व्यक्तित्व के विकास में सहायक होता है। तभी तो यह कहा गया है राम से बड़ा राम का नाम हमारे धर्म विज्ञानियों ने बहुत शोध कर नामकरण संस्कार का आविष्कार किया। ज्योतिष विज्ञान तो नाम के आधार पर ही भविष्य की रूपरेखा तैयार करता है।
निष्क्रमण दैवी जगत् से शिशु की प्रगाढ़ता बढ़े तथा ब्रह्माजी की सृष्टि से वह अच्छी तरह परिचित होकर दीर्घकाल तक धर्म और मर्यादा की रक्षा करते हुए इस लोक का भोग करे यही इस संस्कार का मुख्य उद्देश्य है। निष्क्रमण का अभिप्राय है बाहर निकलना। इस संस्कार में शिशु को सूर्य तथा चन्द्रमा की ज्योति दिखाने का विधान है। भगवान् भास्कर के तेज तथा चन्द्रमा की शीतलता से शिशु को अवगत कराना ही इसका उद्देश्य है। इसके पीछे मनीषियों की शिशु को तेजस्वी तथा विनम्र बनाने की परिकल्पना होगी। उस दिन देवी-देवताओं के दर्शन तथा उनसे शिशु के दीर्घ एवं यशस्वी जीवन के लिये आशीर्वाद ग्रहण किया जाता है। जन्म के चौथे महीने इस संस्कार को करने का विधान है। तीन माह तक शिशु का शरीर बाहरी वातावरण यथा तेज धूप, तेज हवा आदि के अनुकूल नहीं होता है इसलिये प्राय: तीन मास तक उसे बहुत सावधानी से घर में रखना चाहिए। इसके बाद धीरे-धीरे उसे बाहरी वातावरण के संपर्क में आने देना चाहिए। इस संस्कार का तात्पर्य यही है कि शिशु समाज के सम्पर्क में आकर सामाजिक परिस्थितियों से अवगत हो।
अन्नप्राशन इस संस्कार का उद्देश्य शिशु के शारीरिक व मानसिक विकास पर ध्यान केन्द्रित करना है। अन्नप्राशन का स्पष्ट अर्थ है कि शिशु जो अब तक पेय पदार्थो विशेषकर दूध पर आधारित था अब अन्न जिसे शास्त्रों में प्राण कहा गया है उसको ग्रहण कर शारीरिक व मानसिक रूप से अपने को बलवान व प्रबुद्ध बनाए। तन और मन को सुदृढ़ बनाने में अन्न का सर्वाधिक योगदान है। शुद्ध, सात्विक एवं पौष्टिक आहार से ही तन स्वस्थ रहता है और स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का निवास होता है। आहार शुद्ध होने पर ही अन्त:करण शुद्ध होता है तथा मन, बुद्धि, आत्मा सबका पोषण होता है। इसलिये इस संस्कार का हमारे जीवन में विशेष महत्व है। हमारे धर्माचार्यो ने अन्नप्राशन के लिये जन्म से छठे महीने को उपयुक्त माना है। छठे मास में शुभ नक्षत्र एवं शुभ दिन देखकर यह संस्कार करना चाहिए। खीर और मिठाई से शिशु के अन्नग्रहण को शुभ माना गया है। अमृत: क्षीरभोजनम् हमारे शास्त्रों में खीर को अमृत के समान उत्तम माना गया है।
चूड़ाकर्म चूड़ाकर्म को मुंडन संस्कार भी कहा जाता है। हमारे आचार्यो ने बालक के पहले, तीसरे या पांचवें वर्ष में इस संस्कार को करने का विधान बताया है। इस संस्कार के पीछे शुाचिता और बौद्धिक विकास की परिकल्पना हमारे मनीषियों के मन में होगी। मुंडन संस्कार का अभिप्राय है कि जन्म के समय उत्पन्न अपवित्र बालों को हटाकर बालक को प्रखर बनाना है। नौ माह तक गर्भ में रहने के कारण कई दूषित किटाणु उसके बालों में रहते हैं। मुंडन संस्कार से इन दोषों का सफाया होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस संस्कार को शुभ मुहूर्त में करने का विधान है। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यह संस्कार सम्पन्न होता है। विद्यारम्भ विद्यारम्भ संस्कार के क्रम के बारे में हमारे आचार्यो में मतभिन्नता है। कुछ आचार्यो का मत है कि अन्नप्राशन के बाद विद्यारम्भ संस्कार होना चाहिये तो कुछ चूड़ाकर्म के बाद इस संस्कार को उपयुक्त मानते हैं। मेरी राय में अन्नप्राशन के समय शिशु बोलना भी शुरू नहीं कर पाता है और चूड़ाकर्म तक बच्चों में सीखने की प्रवृत्ति जगने लगती है। इसलिये चूड़ाकर्म के बाद ही विद्यारम्भ संस्कार उपयुक्त लगता है। विद्यारम्भ का अभिप्राय बालक को शिक्षा के प्रारम्भिक स्तर से परिचित कराना है। प्राचीन काल में जब गुरुकुल की परम्परा थी तो बालक को वेदाध्ययन के लिये भेजने से पहले घर में अक्षर बोध कराया जाता था। माँ-बाप तथा गुरुजन पहले उसे मौखिक रूप से श्लोक, पौराणिक कथायें आदि का अभ्यास करा दिया करते थे ताकि गुरुकुल में कठिनाई न हो। हमारा शास्त्र विद्यानुरागी है। शास्त्र की उक्ति है सा विद्या या विमुक्तये अर्थात् विद्या वही है जो मुक्ति दिला सके। विद्या अथवा ज्ञान ही मनुष्य की आत्मिक उन्नति का साधन है। शुभ मुहूर्त में ही विद्यारम्भ संस्कार करना चाहिये। कर्णवेध हमारे मनीषियों ने सभी संस्कारों को वैज्ञानिक कसौटी पर कसने के बाद ही प्रारम्भ किया है।
कर्णवेध संस्कार का आधार बिल्कुल वैज्ञानिक है। बालक की शारीरिक व्याधि से रक्षा ही इस संस्कार का मूल उद्देश्य है। प्रकृति प्रदत्त इस शरीर के सारे अंग महत्वपूर्ण हैं। कान हमारे श्रवण द्वार हैं। कर्ण वेधन से व्याधियां दूर होती हैं तथा श्रवण शक्ति भी बढ़ती है। इसके साथ ही कानों में आभूषण हमारे सौन्दर्य बोध का परिचायक भी है। यज्ञोपवीत के पूर्व इस संस्कार को करने का विधान है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्ल पक्ष के शुभ मुहूर्त में इस संस्कार का सम्पादन श्रेयस्कर है।
यज्ञोपवीत अथवा उपनयन बौद्धिक विकास के लिये सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्कार है। धार्मिक और आधात्मिक उन्नति का इस संस्कार में पूर्णरूपेण समावेश है। हमारे मनीषियों ने इस संस्कार के माध्यम से वेदमाता गायत्री को आत्मसात करने का प्रावधान दिया है। आधुनिक युग में भी गायत्री मंत्र पर विशेष शोध हो चुका है। गायत्री सर्वाधिक शक्तिशाली मंत्र है। यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं अर्थात् यज्ञोपवीत जिसे जनेऊ भी कहा जाता है अत्यन्त पवित्र है। प्रजापति ने स्वाभाविक रूप से इसका निर्माण किया है। यह आयु को बढ़ानेवाला, बल और तेज प्रदान करनेवाला है। इस संस्कार के बारे में हमारे धर्मशास्त्रों में विशेष उल्लेख है। यज्ञोपवीत धारण का वैज्ञानिक महत्व भी है। प्राचीन काल में जब गुरुकुल की परम्परा थी उस समय प्राय: आठ वर्ष की उम्र में यज्ञोपवीत संस्कार सम्पन्न हो जाता था। इसके बाद बालक विशेष अध्ययन के लिये गुरुकुल जाता था। यज्ञोपवीत से ही बालक को ब्रह्मचर्य की दीक्षा दी जाती थी जिसका पालन गृहस्थाश्रम में आने से पूर्व तक किया जाता था। इस संस्कार का उद्देश्य संयमित जीवन के साथ आत्मिक विकास में रत रहने के लिये बालक को प्रेरित करना है। वेदारम्भ ज्ञानार्जन से सम्बन्धित है यह संस्कार। वेद का अर्थ होता है ज्ञान और वेदारम्भ के माध्यम से बालक अब ज्ञान को अपने अन्दर समाविष्ट करना शुरू करे यही अभिप्राय है इस संस्कार का। शास्त्रों में ज्ञान से बढ़कर दूसरा कोई प्रकाश नहीं समझा गया है। स्पष्ट है कि प्राचीन काल में यह संस्कार मनुष्य के जीवन में विशेष महत्व रखता था। यज्ञोपवीत के बाद बालकों को वेदों का अध्ययन एवं विशिष्ट ज्ञान से परिचित होने के लिये योग्य आचार्यो के पास गुरुकुलों में भेजा जाता था। वेदारम्भ से पहले आचार्य अपने शिष्यों को ब्रह्मचर्य व्रत कापालन करने एवं संयमित जीवन जीने की प्रतिज्ञा कराते थे तथा उसकी परीक्षा लेने के बाद ही वेदाध्ययन कराते थे। असंयमित जीवन जीने वाले वेदाध्ययन के अधिकारी नहीं माने जाते थे। हमारे चारों वेद ज्ञान के अक्षुण्ण भंडार हैं।
केशान्त गुरुकुल में वेदाध्ययन पूर्ण कर लेने पर आचार्य के समक्ष यह संस्कार सम्पन्न किया जाता था। वस्तुत: यह संस्कार गुरुकुल से विदाई लेने तथा गृहस्थाश्रम में प्रवेश करने का उपक्रम है। वेद-पुराणों एवं विभिन्न विषयों में पारंगत होने के बाद ब्रह्मचारी के समावर्तन संस्कार के पूर्व बालों की सफाई की जाती थी तथा उसे स्नान कराकर स्नातक की उपाधि दी जाती थी। केशान्त संस्कार शुभ मुहूर्त में किया जाता था।
समावर्तन गुरुकुल से विदाई लेने से पूर्व शिष्य का समावर्तन संस्कार होता था। इस संस्कार से पूर्व ब्रह्मचारी का केशान्त संस्कार होता था और फिर उसे स्नान कराया जाता था। यह स्नान समावर्तन संस्कार के तहत होता था। इसमें सुगन्धित पदार्थो एवं औषधादि युक्त जल से भरे हुए वेदी के उत्तर भाग में आठ घड़ों के जल से स्नान करने का विधान है। यह स्नान विशेष मन्त्रोच्चारण के साथ होता था। इसके बाद ब्रह्मचारी मेखला व दण्ड को छोड़ देता था जिसे यज्ञोपवीत के समय धारण कराया जाता था। इस संस्कार के बाद उसे विद्या स्नातक की उपाधि आचार्य देते थे। इस उपाधि से वह सगर्व गृहस्थाश्रम में प्रवेश करने का अधिकारी समझा जाता था। सुन्दर वस्त्र व आभूषण धारण करता था तथा आचार्यो एवं गुरुजनों से आशीर्वाद ग्रहण कर अपने घर के लिये विदा होता था.
विवाह प्राचीन काल से ही स्त्री और पुरुष दोनों के लिये यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्कार है। यज्ञोपवीत से समावर्तन संस्कार तक ब्रह्मचर्य व्रत के पालन का हमारे शास्त्रों में विधान है। वेदाध्ययन के बाद जब युवक में सामाजिक परम्परा निर्वाह करने की क्षमता व परिपक्वता आ जाती थी तो उसे गृर्हस्थ्य धर्म में प्रवेश कराया जाता था। लगभग पच्चीस वर्ष तक ब्रह्मचर्य का व्रत का पालन करने के बाद युवक परिणय सूत्र में बंधता था। हमारे शास्त्रों में आठ प्रकार के विवाहों का उल्लेख है- ब्राह्म, दैव, आर्ष, प्रजापत्य, आसुर, गन्धर्व, राक्षस एवं पैशाच। वैदिक काल में ये सभी प्रथाएं प्रचलित थीं। समय के अनुसार इनका स्वरूप बदलता गया। वैदिक काल से पूर्व जब हमारा समाज संगठित नहीं था तो उस समय उच्छृंखल यौनाचार था। हमारे मनीषियों ने इस उच्छृंखलता को समाप्त करने के लिये विवाह संस्कार की स्थापना करके समाज को संगठित एवं नियमबद्ध करने का प्रयास किया। आज उन्हीं के प्रयासों का परिणाम है कि हमारा समाज सभ्य और सुसंस्कृत है।
अन्त्येष्टि अन्त्येष्टि को अंतिम अथवा अग्नि परिग्रह संस्कार भी कहा जाता है। आत्मा में अग्नि का आधान करना ही अग्नि परिग्रह है। धर्म शास्त्रों की मान्यता है कि मृत शरीर की विधिवत् क्रिया करने से जीव की अतृप्त वासनायें शान्त हो जाती हैं। हमारे शास्त्रों में बहुत ही सहज ढंग से इहलोक और परलोक की परिकल्पना की गयी है। जब तक जीव शरीर धारण कर इहलोक में निवास करता है तो वह विभिन्न कर्मो से बंधा रहता है। प्राण छूटने पर वह इस लोक को छोड़ देता है। उसके बाद की परिकल्पना में विभिन्न लोकों के अलावा मोक्ष या निर्वाण है। मनुष्य अपने कर्मो के अनुसार फल भोगता है। इसी परिकल्पना के तहत मृत देह की विधिवत क्रिया होती है।*विकिपीडिया से


Marriages and gotras

Marriages and gotras

In a patrilineal Hindu society (most common), the bride belongs to her father's gotra before the marriage, and to her husband's gotra after the marriage. The groom on the other hand only belongs to his father's gotra throughout his life.

Marriages within the gotra ('sagotra' marriages) are not permitted under the rule of exogamy in the traditional matrimonial system. The word 'sagotra' is union the words 'sa' + gotra, where 'sa' means same or similar. People within the gotra are regarded as kin and marrying such a person would be thought of as incest. The Tamil words 'sagotharan' (brother) and 'sagothari' (sister) derive their roots from the Sanskrit word 'sahodara' (सहोदर) meaning co-uterine or born of the same womb. In communities where gotra membership passed from father to children, marriages were allowed between maternal uncle and niece[2], while such marriages were forbidden in matrilineal communities, like Malayalis and Tuluvas, where gotra membership was passed down from the mother.

A much more common characteristic of south Indian Hindu society is permission for marriage between cross-cousins (children of brother and sister). Thus, a man is allowed to marry his maternal uncle's daughter or his paternal aunt's daughter, but is not allowed to marry his father's brother's daughter. She would be considered a parallel cousin who is treated as a sister.[3]

North Indian Hindu society not only follows the rules of gotra for marriages, but also had many regulations which went beyond the basic definition of gotra and had a broader definition of incestuousness.[4] Some communities in North India do not allow marriage with some other communities on the lines that both the Communities are having brotherhood.[5]

An acceptable social workaround for sagotra marriages is to perform a 'Dathu' (adoption) of the bride to a family of different gotra (usually dathu is given to the bride's maternal uncle who obviously belongs to different gotra by the same rule) and let them perform the 'kanniyadhanam' ('kanni' (virgin) + 'dhanam' (gift)). However, this is easier said as it would be quite difficult for the bride's father to watch another man give his daughter's hand away in marriage in his own presence.

Khap panchayats in Haryana have been making a huge fuss over banning "same gotra marriages." Kadyan Khap International convener Naresh Kadyan had moved a petition seeking amendment to the Hindu Marriage Act (HMA) so as to legally prohibit marriages in the same gotra. However, the petition was dismissed as withdrawn after a vacation Bench of Justices S N Dhingra and A K Pathak of the Delhi High Court warned that a heavy cost would be imposed on the petitioner for wasting the time of the court. In course of the proceedings, the bench observed, “You don’t know what is a gotra. Which Hindu text prescribes banning of sagotra (same clan) marriage? Why are you wasting the time of the court? If you are not able to substantiate your words, then you should not have come before the court.” [6