Thursday, February 28, 2013
Tuesday, February 26, 2013
Wednesday, February 6, 2013
मार्कंडेय ऋषि और महामृत्युंजय मंत्र
भगवान शिव
के उपासक ऋषि मृकंदु जी के घर कोई संतान नहीं थी .उन्होंने भगवान शिव की
कठिन तपस्या की. भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा . उन्होंने संतान मांगी .भगवान शिव कहने लगे कि तुम्हारे भाग्य में संतान
नहीं है .तुमने हमारी कठिन भक्ति की है इसलिए हम तुम्हें एक पुत्र
देते हैं.उसकी आयु केवल तेरह वर्ष की होगी.
कुछ समय के बाद उनके घर में एक पुत्र ने जन्म लिया. उसका नाम मार्कंडेय रखा. पिता ने मार्कंडेय को शिक्षा के लिए ऋषि मुनियों के आश्रम में भेज दिया .बारह वर्ष व्यतीत हो गए .मार्कंडेय शिक्षा लेकर घर लौटे. उनके माता- पिता उदास थे.जब मार्कंडेय ने उनसे उदासी का कारण पूछा तो पिता ने मार्कंडेय को सारा हाल बता दिया.मार्कंडेय ने पिता से कहा कि उसे कुछ नहीं होगा.
माता-पिता से आज्ञा लेकर मार्कंडेय शिव की तपस्या करने चले गए.उन्होंने महामृत्युंजय मंत्र की रचना की .एक वर्ष तक उसका जाप करते रहे. जब तेरह वर्ष पूर्ण हो गए तो उन्हें लेने के लिए यमराज आए .वे शिव भक्ति में लीन थे. जैसे ही यमराज उनके प्राण लेने आगे बढे तो मार्कंडेय जी ने शिवलिंग से लिपट गए.उसी समय भगवान शिव त्रिशूल उठाए प्रकट हुए और यमराज से कहा कि इस बालक के प्राणों को तुम नहीं ले जा सकते.हमने इस बालक को दीर्घायु प्रदान की है. यमराज ने भगवान शिव को नमन किया और वहाँ से चले गए .
तब भगवान शिव ने मार्कंडेय को कहा तुम्हारे द्वारा लिखा गया यह मंत्र हमें अत्यंत प्रिय होगा .भविष्य में जो कोई इसका स्मरण करेगा हमारा आशीर्वाद उस पर सदैव बना रहेगा.इस मंत्र का जप करने वाला मृत्यु के भय से मुक्त हो जाता है और भगवान शिव की कृपा उस पर हमेशा बनी रहती है.
यही बालक बड़ा होकर मार्कंडेय ऋषि के नाम से विख्यात हुआ.
अकाल मृत्यु वह मरे ,जो काम करे चंडाल का,
काल उसका क्या बिगाड़े ,जो भक्त हो महाकाल का.
कुछ समय के बाद उनके घर में एक पुत्र ने जन्म लिया. उसका नाम मार्कंडेय रखा. पिता ने मार्कंडेय को शिक्षा के लिए ऋषि मुनियों के आश्रम में भेज दिया .बारह वर्ष व्यतीत हो गए .मार्कंडेय शिक्षा लेकर घर लौटे. उनके माता- पिता उदास थे.जब मार्कंडेय ने उनसे उदासी का कारण पूछा तो पिता ने मार्कंडेय को सारा हाल बता दिया.मार्कंडेय ने पिता से कहा कि उसे कुछ नहीं होगा.
माता-पिता से आज्ञा लेकर मार्कंडेय शिव की तपस्या करने चले गए.उन्होंने महामृत्युंजय मंत्र की रचना की .एक वर्ष तक उसका जाप करते रहे. जब तेरह वर्ष पूर्ण हो गए तो उन्हें लेने के लिए यमराज आए .वे शिव भक्ति में लीन थे. जैसे ही यमराज उनके प्राण लेने आगे बढे तो मार्कंडेय जी ने शिवलिंग से लिपट गए.उसी समय भगवान शिव त्रिशूल उठाए प्रकट हुए और यमराज से कहा कि इस बालक के प्राणों को तुम नहीं ले जा सकते.हमने इस बालक को दीर्घायु प्रदान की है. यमराज ने भगवान शिव को नमन किया और वहाँ से चले गए .
तब भगवान शिव ने मार्कंडेय को कहा तुम्हारे द्वारा लिखा गया यह मंत्र हमें अत्यंत प्रिय होगा .भविष्य में जो कोई इसका स्मरण करेगा हमारा आशीर्वाद उस पर सदैव बना रहेगा.इस मंत्र का जप करने वाला मृत्यु के भय से मुक्त हो जाता है और भगवान शिव की कृपा उस पर हमेशा बनी रहती है.
यही बालक बड़ा होकर मार्कंडेय ऋषि के नाम से विख्यात हुआ.
अकाल मृत्यु वह मरे ,जो काम करे चंडाल का,
काल उसका क्या बिगाड़े ,जो भक्त हो महाकाल का.
Monday, January 21, 2013
Wednesday, January 9, 2013
मोहयाल-मिलन लुधियाना :6 जनवरी 2013
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| बाएं से राजिंदर मेहता लव,डिम्पी छिब्बर ,संजीव राय वैद,अशोक लव,मेहता ओ पी मोहन,डी.वी.मोहन.योगेश मेहता,संजय छिब्बर |
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| अनिल दत्ता,राजिंदर मेहता लव,बंटी बाली,संजीव राय वैद,अशोक लव,मेहता ओ पी मोहन.राजेश्वर चौधरी,योगेश मेहता.संजय छिब्बर |
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| द्वारका नाथ छिब्बर,अशोक लव,मेहता ओ पी मोहन,राजेश्वर चौधरी,गुलशन दत्ता.संजय छिब्बर,योगेश मेहता ,मन्नू छिब्बर |
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| अनिल दत्ता,डिम्पी छिब्बर,बंटी बाली ,योगेश मेहता,मनीष बाली ,राजिंदर मेहता लव,अशोक लव,मेहता ओ पी मोहन,द्वारका नाथ छिब्बर,संजीव राय वैद,नरिंदर वैद,संजय छिब्बर.राजन,विजयंत बाली |
मोहयाल मिलन लुधियाना,6 जनवरी 2013
Saturday, December 29, 2012
संघर्ष करती युवती का बलिदान
बलात्कारियों से सामना करके आत्म-सम्मान के लिए
संघर्ष करने वाली ,भारतीय समाज को झकझोर देने वाली, दिल्ली पुलिस की
अकर्मण्यता को उजागर करने वाली युवती अब हमारे मध्य नहीं रही.आज 29 दिसंबर 2012 को प्रातः
2:15 बजे उसने अंतिम साँसें लीं. इसके साथ ही वह भारतीय समाज के समक्ष अनेक
प्रश्न छोड़ गई है. देखना यह है कि क्या यह मार्मिक बलिदान समाज को कोई
सार्थक दिशा देगा?
नम आँखों से विनम्र श्रद्धांजलि !
नम आँखों से विनम्र श्रद्धांजलि !
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