










श्री अशोक लव की ' जनरल मोहयाल सभा ' के सेक्रेटरी के पद पर नियुक्ति हुई है । जी एम एस के सेक्रेटरीएट में सितंबर 2010 को नए पदाधिकारियों ने पदभार संभाला । हमारी हार्दिक शुभकामनाएँ। वे लगभग 25 वर्षों से जी एम एस के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। वे जुलाई 1987 से ' मोहयाल मित्र ' के हिंदी संपादक हैं। जी एमएस के समस्त आयोजनों में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। इन कार्यक्रमों का संचालन उन्होंने किया है ।
Photo (FROM LEFT):Smt Sunita Mehta , Shri Ashok Lav, Shri GL Datta Josh, Rzd BD Bali, Bakshi SK ChhibberIAS, Shri OP Mohan,Shri BL Chhibber.(standing)-Shri Ashwani Bakshi, Shri Yogesh Mehta,Shri Pushp Bali,Shri SK Chibber, Shri KG Mohan,Shri DV Mohan and Shri Vinod Mehta
चुनाव अधिकारी : श्री पी एल मेहता, मेजर जनरल के के बख्शी, श्री बी एम दत्ता
Major Gen KK Bakshi (ElectionOfficer ) declaring results.Mr PL Mehta and Mr BM Dutta ( Members) are sitting with him.
Mr Anil Dutta,Mr Rit Mohan and Mr Vipin Mohan .....waiting for good news
London, Aug 31 (ANI): The standard equipment found with doctors, stethoscope, may soon be history as millions of doctors across the world are signing up for a free iphone app that can monitor heartbeat. Peter Bentley of the University College London has invented the iStethoscope application, which monitors heartbeat through sensors in the phone.
As many as 500 apps are being downloaded everyday since a free version was introduced last week. Everybody is very excited about the potential of the adoption of mobile phone technology into the medical workplace, and rightly so," the Telegraph quoted Bentley as saying.
"Smartphones are incredibly powerful devices packed full of sensors, cameras, high-quality microphones with amazing displays," he added. (ANI)
Facebook's new security feature: remote logouts Associated PressFri, Sep 3 12:08 PM
Facebook is rolling out a new security feature that lets users log out of their accounts remotely from another computer.
To do this, go to "account settings" on your Facebook page and click on "change" next to "account security." There, you'll see where else your Facebook account is logged in, including the type of device and the city it's in or near. To log out of any of them, click "end activity."
Facebook is making this available over the next couple of weeks. It will be accessible on computers, but not mobile devices.
The feature is similar to what Google Inc.'s Gmail offers to its users, and Facebook says it's designed to help users keep their logins secure.

मैया! मैं नहिं माखन खायो। ख्याल परै ये सखा सबै मिलि मेरैं मुख लपटायो॥
देखि तुही छींके पर भाजन ऊंचे धरि लटकायो।
हौं जु कहत नान्हें कर अपने मैं कैसें करि पायो॥
मुख दधि पोंछि बुद्धि इक कीन्हीं दोना पीठि दुरायो।
डारि सांटि मुसुकाइ जशोदा स्यामहिं कंठ लगायो॥
बाल बिनोद मोद मन मोह्यो भक्ति प्राप दिखायो।
सूरदास जसुमति को यह सुख सिव बिरंचि नहिं पायो॥
राग रामकली में बद्ध यह सूरदास का अत्यंत प्रचलित पद है। श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं में माखन चोरी की लीला सुप्रसिद्ध है। वैसे तो कन्हैया ग्वालिनों के घरों में जा-जाकर माखन चुराकर खाया करते थे। लेकिन आज उन्होंने अपने ही घर में माखन चोरी की और यशोदा ने उन्हें देख भी लिया। इस पद में सूरदास ने श्रीकृष्ण के वाक्चातुर्य का जिस प्रकार वर्णन किया है वैसा अन्यत्र नहीं मिलता।
जब यशोदा ने देख लिया कि कान्हा ने माखन खाया है तो पूछा -- क्यों रे कान्हा! तूने माखन खाया है क्या? तब कन्हैया बोले-- मैया! मैंने माखन नहीं खाया है। मुझे तो ऐसा लगता है कि इन ग्वाल-बालों ने ही बल पूर्वक मेरे मुख पर माखन लगा दिया है। फिर बोले मैया तू ही सोच, तूने यह छींका किना ऊंचा लटका रखा है और मेरे हाथ कितने छोटे-छोटे हैं। इन छोटे हाथों से मैं कैसे छींके को उतार सकता हूँ। कन्हैया ने मुख से लिपटा माखन पोंछा और एक दोना जिसमें माखन बचा रह गया था उसे पीछे छिपा लिया। कन्हैया की इस चतुराई को देखकर यशोदा मन ही मन मुस्कराने लगीं और छडी फेंककर कन्हैया को गले से लगा लिया। सूरदास कहते हैं कि यशोदा को जिस सुख की प्राप्ति हुई वह सुख शिव व ब्रह्मा को भी दुर्लभ है। ।
जसोदा हरि पालनैं झुलावै। हलरावै दुलरावै मल्हावै जोइ सोइ कछु गावै॥
मेरे लाल को आउ निंदरिया काहें न आनि सुवावै।
तू काहै नहिं बेगहिं आवै तोकौं कान्ह बुलावै॥
कबहुं पलक हरि मूंदि लेत हैं कबहुं अधर फरकावैं।
सोवत जानि मौन ह्वै कै रहि करि करि सैन बतावै॥
इहि अंतर अकुलाइ उठे हरि जसुमति मधुरैं गावै।
जो सुख सूर अमर मुनि दुरलभ सो नंद भामिनि पावै॥
राग घनाक्षरी में बद्ध इस पद में सूरदास जी ने भगवान् बालकृष्ण की शयनावस्था का सुंदर चित्रण किया है। वह कहते हैं कि मैया यशोदा श्रीकृष्ण को पालने में झुला रही हैं। कभी तो वह पालने को हल्का-सा हिला देती हैं, कभी कन्हैया को प्यार करने लगती हैं और कभी मुख चूमने लगती हैं। ऐसा करते हुए वह जो मन में आता है वही गुनगुनाने भी लगती हैं। लेकिन कन्हैया को तब भी नींद नहीं आती है। इसीलिए यशोदा नींद को उलाहना देती हैं कि अरी निंदिया तू आकर मेरे लाल को सुलाती क्यों नहीं? तू शीघ्रता से क्यों नहीं आती? देख, तुझे कान्हा बुलाता है। जब यशोदा निंदिया को उलाहना देती हैं तब श्रीकृष्ण कभी तो पलकें मूंद लेते हैं और कभी होंठों को फडकाते हैं। (यह सामान्य-सी बात है कि जब बालक उनींदा होता है तब उसके मुखमंडल का भाव प्राय: ऐसा ही होता है जैसा कन्हैया के मुखमंडल पर सोते समय जाग्रत हुआ।) जब कन्हैया ने नयन मूंदे तब यशोदा ने समझा कि अब तो कान्हा सो ही गया है। तभी कुछ गोपियां वहां आई। गोपियों को देखकर यशोदा उन्हें संकेत से शांत रहने को कहती हैं। इसी अंतराल में श्रीकृष्ण पुन: कुनमुनाकर जाग गए। तब यशोदा उन्हें सुलाने के उद्देश्य से पुन: मधुर-मधुर लोरियां गाने लगीं। अंत में सूरदास नंद पत्नी यशोदा के भाग्य की सराहना करते हुए कहते हैं कि सचमुच ही यशोदा बडभागिनी हैं। क्योंकि ऐसा सुख तो देवताओं व ऋषि-मुनियों को भी दुर्लभ है।
जाके प्रिय न राम-बैदेही। तजिये ताहि कोटि बैरी सम, जद्यपि परम सनेही॥
तज्यो पिता प्रहलाद, बिभीषण बंधु, भरत महतारी।
बलि गुरु तज्यो कंत ब्रज-बनितन्हि, भये मुद-मंगलकारी॥
नाते नेह राम के मनियत सुहृद सुसेब्य जहाँ लौं।
अंजन कहा आँखि जेहि फूटै, बहुतक कहौं कहाँ लौं॥
तुलसी सो सब भाँति परम हित पूज्य प्रानते प्यारो।
जासो होय सनेह राम-पद, एतो मतो हमारो॥
अयुक्तं स्वामिनो युक्तं युक्तं नीचस्य दूषणम।