![]() |
| दायें से-अशोक लव ,योगेश मेहता,संजीव राय वैद,बी एल छिब्बर,डी वी मोहन,धनेश दत्ता,संजीव बाली'बंटी',मेहता ओ पी मोहन,रायजादा बी डी बाली,मेजर दमन दत्ता,एस के छिब्बर और पी के दत्ता। |
Monday, October 22, 2012
Happy Birthday Mehta OP Mohan मेहता ओ पी मोहन का जन्म-दिन
Friday, October 12, 2012
Mohyal-Milan of Mohyal Sabha Kurukshetra
Wednesday, October 10, 2012
Mohyal Play School,Mohyal Ashram Haridwar
![]() |
| बाएं से सर्वश्री अशोक लव,मेहता ओ पी मोहन,के के मेहता,धनेश दत्ता,संजीव बाली.पीछे श्रीमती के एल छिब्बर और श्री एस के छिब्बर. |
![]() |
| बाएं से सर्वश्री धनेश दत्ता,एस के छिब्बर,श्रीमती के एल छिब्बर,मेहता ओ पी मोहन,योगेश मेहता,श्री बाली, अशोक लव,मेजर दमन दत्ता. |
![]() |
| श्रीमती एन बाला लव,अशोक लव धनेश दत्ता,मेजर दमन दत्ता |
Ashok Lav honoured with 'Yagyavalkya Patrakarita Samman '
Tuesday, July 17, 2012
मोहयाल मित्र के संपादक के रूप में पच्चीस वर्ष / अशोक लव
* यह चित्र बंटी बाली (संजीव बाली ) के सौजन्य से
Monday, May 28, 2012
गीत ---आधी रात के बाद एक चोर निकलता है
गीतकार आनंद बक्षी , फिल्म--राजा रानी , आशा भोंसले और भूपिंदर
आ: जब अंधेरा होता है, आधी रात के बाद एक चोर... भू: पा पर पा... आ: ... निकलता है, काली सी सड़क पे ये आवाज़, आती है दोनो: चोर\-चोर, चोर\-चोर, चोर\-चोर, चोर\-चोर आ: शहरों की गलियों में जब अंधेरा होता है आधी रात के बाद एक चोर निकलता है, काली सी सड़क पे ये आवाज़ आती है चोर\-चोर, चोर\-चोर, चोर\-चोर, चोर\-चोर शहरों की गलियों में जब... अंधेरा होता है, आधी रात के बाद... आ: लोग बन्द कमरों में, चैन से जब सोते हैं भू: लोग बन्द कमरों में, चैन से जब सोते हैं दोनो: ये जागता है सारी रात भागता है आ: ताले टूटे, होते हैं, जब सवेरा होता है, या पप परा... %[ a lot of la-la la'ing without lyrics] जब अंधेरा... आ: सुन लो पहरेदारों, होश में रहना यारों भू: सुन लो पहरेदारों, होश में रहना यारों दोनो: साथ घूमती है, नागन रात झूमती है आ: अल्बेला, मस्ताना, वो सवेरा होता है, या पप पर... %[ a lot of la-la la'ing without lyrics] जब अंधेरा...
Friday, April 27, 2012
EK Khandan Kee Kahanee
नेहरू खानदान यानी गयासुद्दीन गाजी का वंश [अमर उजाला के वरिष्ठ पत्रकार दिनेश चन्द्र मिश्र ]
जम्मू-कश्मीर में आए महीनों हो गए थे, एक बात अक्सर दिमाग में खटकती थी कि अभी तक नेहरू के खानदान का कोई क्यों नहीं मिला, जबकि हमने किताबों में पढ़ा था कि वह कश्मीरी पंडित थे। नाते-रिश्तेदार से लेकर दूरदराज तक में से कोई न कोई नेहरू खानदान का तो मिलना ही चाहिए था। नेहरू राजवंश कि खोज में सियासत के पुराने खिलाडिय़ों से मिला लेकिन जानकारी के नाम पर मोतीलाल नेहरू के पिता गंगाधर नेहरू का नाम ही सामने आया। अमर उजाला दफ्तर के नजदीक बहती तवी के किनारे पहुंचकर एक दिन इसी बारे में सोच रहा था तो ख्याल आया कि जम्मू-कश्मीर वूमेन कमीशन की सचिव हाफीजा मुज्जफर से मिला जाए, शायद वह कुछ मदद कर सके |
अगले दिन जब आफिस से हाफीजा के पास पहुंचा तो वह सवाल सुनकर चौंक गई। बोली पंडित जी आप पंडित नेहरू के वंश का पोस्टमार्टम करने आए हैं क्या? हंसकर सवाल टालते हुए कहा कि मैडम ऐसा नहीं है, बस बाल कि खाल निकालने कि आदत है इसलिए मजबूर हूँ । यह सवाल काफी समय से खटक रहा था।
कश्मीरी चाय का आर्डर देने के बाद वह अपने बुक रैक से एक किताब निकाली, वह थी रॉबर्ट हार्डी एन्ड्रूज कि किताब ए लैम्प फार इंडिया- द स्टोरी ऑफ मदाम पंडित। उस किताब मे तथाकथित गंगाधर का चित्र छपा था। जिसके अनुसार गंगाधर असल में एक सुन्नी मुसलमान थे जिनका असली नाम था गयासुद्दीन गाजी। इस फोटो को दिखाते हुए हाफीजा ने कहा कि इसकी पुष्टि के लिए नेहरू ने जो आत्मकथा लिखी है, उसको पढऩा जरूरी है। नेहरू की आत्मकथा भी अपने रैक से निकालते हुए एक पेज को पढऩे को कहा। इसमें एक जगह लिखा था कि उनके दादा अर्थात मोतीलाल के पिता गंगा धर थे।
इसी तरह जवाहर की बहन कृष्णा ने भी एक जगह लिखा है कि उनके दादा जी मुगल सल्तनत बहादुरशाह जफर के समय में नगर कोतवाल थे। अब इतिहासकारो ने खोजबीन की तो पाया कि बहादुरशाह जफर के समय कोई भी हिन्दू इतनी महत्वपूर्ण ओहदे पर नहीं था। और खोजबीन करने पर पता चला कि उस वक्त के दो नायाब कोतवाल हिन्दू थे नाम थे भाऊ सिंह और काशीनाथ जो कि लाहौरी गेट दिल्ली में तैनात थे।
लेकिन किसी गंगा धर नाम के व्यक्ति का कोई रिकार्ड नहीं मिला है। नेहरू राजवंश की खोज में मेहदी हुसैन की पुस्तक बहादुरशाह जफर और 1857 का गदर में खोजबीन करने पर मालूम हुआ। गंगा धर नाम तो बाद में अंग्रेजों के कहर के डर से बदला गया था,असली नाम तो था गयासुद्दीन गाजी। जब अंग्रेजों ने दिल्ली को लगभग जीत लिया था तब मुगलों और मुसलमानों के दोबारा विद्रोह के डर से उन्होंने दिल्ली के सारे हिन्दुओं और मुसलमानों को शहर से बाहर करके तम्बुओं में ठहरा दिया था। जैसे कि आज कश्मीरी पंडित रह रहे हैं। अंग्रेज वह गलती नहीं दोहराना चाहते थे जो हिन्दू राजाओं-पृथ्वीराज चौहान ने मुसलमान आ•्रांताओंजीवित छोडकर की थी,इसलिये उन्होंने चुन-चुन कर मुसलमानों को मारना शुरु किया । लेकिन कुछ मुसलमान दिल्ली से भागकर पास के इलाको मे चले गये थे। उसी समय यह परिवार भी आगरा की तरफ कुच कर गया। नेहरू ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि आगरा जाते समय उनके दादा गंगा धर को अंग्रेजों ने रोककर पूछताछ की थी लेकिन तब गंगा धर ने उनसे कहा था कि वे मुसलमान नहीं हैं कश्मीरी पंडित हैं और अंग्रेजों ने उन्हें आगरा जाने दिया बाकी तो इतिहास है ही ।
यह धर उपनाम कश्मीरी पंडितों में आमतौर पाया जाता है और इसी का अपभ्रंश होते-होते और धर्मान्तरण होते-होते यह दर या डार हो गया जो कि कश्मीर के अविभाजित हिस्से में आमतौर पाया जाने वाला नाम है। लेकिन मोतीलाल ने नेहरू उपनाम चुना ताकि यह पूरी तरह से हिन्दू सा लगे। इतने पीछे से शुरुआत करने का मकसद सिर्फ यही है कि हमें पता चले कि खानदानी लोगों कि असलियत क्या होती है।
एक कप चाय खत्म हो गयी थी, दूसरी का आर्डर हाफीजा ने देते हुए के एन प्राण कि पुस्तक द नेहरू डायनेस्टी निकालने के बाद एक पन्ने को पढऩे को दिया। उसके अनुसार जवाहरलाल मोतीलाल नेहरू के पुत्र थे और मोतीलाल के पिता का नाम था गंगाधर । यह तो हम जानते ही हैं कि जवाहरलाल कि एक पुत्री थी इन्दिरा प्रियदर्शिनी नेहरू ।
कमला नेहरू उनकी माता का नाम था। जिनकी मृत्यु स्विटजरलैण्ड में टीबी से हुई थी। कमला शुरु से ही इन्दिरा के फिरोज से विवाह के खिलाफ थीं क्यों यह हमें नहीं बताया जाता। लेकिन यह फि रोज गाँधी कौन थे? फिरोज उस व्यापारी के बेटे थे जो आनन्द भवन में घरेलू सामान और शराब पहुँचाने का काम करता था।
आनन्द भवन का असली नाम था इशरत मंजिल और उसके मालिक थे मुबारक अली। मोतीलाल नेहरू पहले इन्हीं मुबारक अली के यहाँ काम करते थे। सभी जानते हैं की राजीव गाँधी के नाना का नाम था जवाहरलाल नेहरू लेकिन प्रत्येक व्यक्ति के नाना के साथ ही दादा भी तो होते हैं। फि र राजीव गाँधी के दादाजी का नाम क्या था? किसी को मालूम नहीं, क्योंकि राजीव गाँधी के दादा थे नवाब खान। एक मुस्लिम व्यापारी जो आनन्द भवन में सामान सप्लाई करता था और जिसका मूल निवास था जूनागढ गुजरात में है।
नवाब खान ने एक पारसी महिला से शादी की और उसे मुस्लिम बनाया। फिरोज इसी महिला की सन्तान थे और उनकी माँ का उपनाम था घांदी (गाँधी नहीं)घांदी नाम पारसियों में अक्सर पाया जाता था। विवाह से पहले फि रोज गाँधी ना होकर फिरोज खान थे और कमला नेहरू के विरोध का असली कारण भी यही था। हमें बताया जाता है कि फिरोज गाँधी पहले पारसी थे यह मात्र एक भ्रम पैदा किया गया है । इन्दिरा गाँधी अकेलेपन और अवसाद का शिकार थीं । शांति निकेतन में पढ़ते वक्त ही रविन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें अनुचित व्यवहारके लिये निकाल बाहर किया था।
अब आप खुद ही सोचिये एक तन्हा जवान लडक़ी जिसके पिता राजनीति में पूरी तरह से व्यस्त और माँ लगभग मृत्यु शैया पर पड़ी हुई हों थोडी सी सहानुभूति मात्र से क्यों ना पिघलेगी विपरीत लिंग की ओर, इसी बात का फायदा फिरोज खान ने उठाया और इन्दिरा को बहला-फुसलाकर उसका धर्म परिवर्तन करवाकर लन्दन की एक मस्जिद में उससे शादी रचा ली। नाम रखा मैमूना बेगम। नेहरू को पता चला तो वे बहुत लाल-पीले हुए लेकिन अब क्या किया जा सकता था।
जब यह खबर मोहनदास करमचन्द गाँधी को मिली तो उन्होंने नेहरू को बुलाकर समझाया। राजनैतिक छवि की खातिर फिरोज को मनाया कि वह अपना नाम गाँधी रख ले, यह एक आसान काम था कि एक शपथ पत्र के जरिये बजाय धर्म बदलने के सिर्फ नाम बदला जाये तो फिरोज खान घांदी बन गये फिरोज गाँधी।
विडम्बना यह है कि सत्य-सत्य का जाप करने वाले और सत्य के साथ मेरे प्रयोग नामक आत्मकथा लिखने वाले गाँधी ने इस बात का उल्लेख आज तक नहीं नहीं किया। खैर उन दोनों फिरोज और इन्दिरा को भारत बुलाकर जनता के सामने दिखावे के लिये एक बार पुन: वैदिक रीति से उनका विवाह करवाया गया ताकि उनके खानदान की ऊँची नाक का भ्रम बना रहे । इस बारे में नेहरू के सेकेरेटरी एम.ओ.मथाई अपनी पुस्तक प्रेमेनिसेन्सेस ऑफ नेहरू एज ;पृष्ट 94 पैरा 2 (अब भारत में प्रतिबंधित है किताब) में लिखते हैं कि पता नहीं क्यों नेहरू ने सन 1942 में एक अन्तर्जातीय और अन्तर्धार्मिक विवाह को वैदिक रीतिरिवाजों से किये जाने को अनुमति दी जबकि उस समय यह अवैधानिक था का कानूनी रूप से उसे सिविल मैरिज होना चाहिये था । यह तो एक स्थापित तथ्य है कि राजीव गाँधी के जन्म के कुछ समय बाद इन्दिरा और फि रोज अलग हो गये थे हालाँकि तलाक नहीं हुआ था । फिरोज गाँधी अक्सर नेहरू परिवार को पैसे माँगते हुए परेशान किया करते थे और नेहरू की राजनैतिक गतिविधियों में हस्तक्षेप तक करने लगे थे। तंग आकर नेहरू ने फिरोज के तीन मूर्ति भवन मे आने-जाने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था । मथाई लिखते हैं फिरोज की मृत्यु से नेहरू और इन्दिरा को बड़ी राहत मिली थी। 1960 में फिरोज गाँधी की मृत्यु भी रहस्यमय हालात में हुई थी जबकी वह दूसरी शादी रचाने की योजना बना चुके थे। संजय गाँधी का असली नाम दरअसल संजीव गाँधी था अपने बडे भाई राजीव गाँधी से मिलता जुलता ।
लेकिन संजय नाम रखने की नौबत इसलिये आई क्योंकि उसे लन्दन पुलिस ने इंग्लैण्ड में कार चोरी के आरोप में पकड़ लिया था और उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया था। ब्रिटेन में तत्कालीन भारतीय उच्चायुक्त कृष्ण मेनन ने तब मदद करके संजीव गाँधी का नाम बदलकर नया पासपोर्ट संजय गाँधी के नाम से बनवाया था, इन्हीं कृष्ण मेनन साहब को भ्रष्टाचार के एक मामले में नेहरू और इन्दिरा ने बचाया था ।
अब संयोग पर संयोग देखिये संजय गाँधी का विवाह मेनका आनन्द से हुआ। कहा जाता है मेनका जो कि एक सिख लडकी थी संजय की रंगरेलियों की वजह से उनके पिता कर्नल आनन्द ने संजय को जान से मारने की धमकी दी थी फिर उनकी शादी हुई और मेनका का नाम बदलकर मानेका किया गया क्योंकि इन्दिरा गाँधी को यह नाम पसन्द नहीं था। फिर भी मेनका कोई साधारण लडकी नहीं थीं क्योंकि उस जमाने में उन्होंने बॉम्बे डाईंग के लिये सिर्फ एक तौलिये में विज्ञापन किया था। आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि संजय गाँधी अपनी माँ को ब्लैकमेल करते थे और जिसके कारण उनके सभी बुरे कामो पर इन्दिरा ने हमेशा परदा डाला और उसे अपनी मनमानी करने कि छूट दी ।
एम.ओ.मथाई अपनी पुस्तक के पृष्ठ 206 पर लिखते हैं - 1948 में वाराणसी से एक सन्यासिन दिल्ली आई जिसका काल्पनिक नाम श्रद्धा माता था। वह संस्कत की विद्वान थी और कई सांसद उसके व्याख्यान सुनने को बेताब रहते थे । वह भारतीय पुरालेखों और सनातन संस्कृत की अच्छी जानकार थी। नेहरू के पुराने कर्मचारी एस.डी.उपाध्याय ने एक हिन्दी का पत्र नेहरू को सौंपा जिसके कारण नेहरू उस सन्यासिन को एक इंटरव्यू देने को राजी हुए । चूँकि देश तब आजाद हुआ ही था और काम बहुत था। नेहरू ने अधिकतर बार इंटरव्य़ू आधी रात के समय ही दिये । मथाई के शब्दों में एक रात मैने उसे पीएम हाऊस से निकलते देखा वह बहुत ही जवान खूबसूरत और दिलकश थी। एक बार नेहरू के लखनऊ दौरे के समय श्रध्दा माता उनसे मिली और उपाध्याय जी हमेशा की तरह एक पत्र लेकर नेहरू के पास आये नेहरू ने भी उसे उत्तर दिया और अचानक एक दिन श्रद्धा माता गायब हो गईं किसी के ढूँढे से नहीं मिलीं ।
नवम्बर 1949 में बेंगलूर के एक कान्वेंट से एक सुदर्शन सा आदमी पत्रों का एक बंडल लेकर आया। उसने कहा कि उत्तर भारत से एक युवती उस कान्वेंट में कुछ महीने पहले आई थी और उसने एक बच्चे को जन्म दिया । उस युवती ने अपना नाम पता नहीं बताया और बच्चे के जन्म के तुरन्त बाद ही उस बच्चे को वहाँ छोडकर गायब हो गई थी । उसकी निजी वस्तुओं में हिन्दी में लिखे कुछ पत्र बरामद हुए जो प्रधानमन्त्री द्वारा लिखे गये हैं पत्रों का वह बंडल उस आदमी ने अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया । मथाई लिखते हैं . मैने उस बच्चे और उसकी माँ की खोजबीन की काफी कोशिश की लेकिन कान्वेंट की मुख्य मिस्ट्रेस जो कि एक विदेशी महिला थी बहुत कठोर अनुशासन वाली थी और उसने इस मामले में एक शब्द भी किसी से नहीं कहा लेकिन मेरी इच्छा थी कि उस बच्चे का पालन-पोषण मैं करुँ और उसे रोमन कथोलिक संस्कारो में बड़ा करूँ चाहे उसे अपने पिता का नाम कभी भी मालूम ना हो लेकिन विधाता को यह मंजूर नहीं था। नेहरू राजवंश की कुंडली जानने के बाद घड़ी की तरफ देखा तो शाम पांच बज गए थे, हाफीजा से मिली ढेरों प्रमाणिक जानकारी के लिए शुक्रिया अदा करना दोस्ती के वसूल के खिलाफ था, इसलिए फिर मिलते हैं कहकर चल दिए अमर उजाला जम्मू दफ्तर की ओर।
संकलनकर्ता
संजय एस. कुमार गीते
०९९७७७४९२५७
Thursday, April 19, 2012
आवश्यकता से अधिक धन / अशोक लव
Mohyal Prayer मोहयाल प्रार्थना
....................ॐ स्वस्ति! ॐ परम पिता परमात्मा को हमारा प्रेम पूर्वक नमस्कार ! ॐ स्वस्ति ! सभी सुखी हों. सब का कल्याण हो. सबका आपस में प्रेम हो . सब मिल कर अपने समाज की भलाई का विचार करें. सब उसी में अपना भला समझें जिसमें सबका भला हो, हित हो, लाभ हो. मन वचन और कर्म से कोई एक-दूसरे की हानि न करे.सब एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव रखें. दूसरों की बातों को धैर्य और शांतिपूर्वक सुनें. अपनी बातें मधुर शब्दों में कहें. हम नि:स्वार्थ भाव से अपने समाज की भलाई के लिए कार्य करें.
Thursday, March 22, 2012
नव संवत्सर २०६९
नव संवत्सर २०६९
22 Mar 2012, नवभारतटाइम्स.कॉम ज्योतिषी और आध्यात्मिक चिंतक
23 मार्च , 2012 , शुक्रवार को हिंदू कैलेंडर का नववर्ष दस्तक देगा। संवत 2069 अस्तित्व में आएगा. संवत 2068 , जिसका नाम था ' क्रोधी ', वह इतिहास के आगोश में विलीन हो जाएगा।
नवीन संवत 2069 जिसका नाम ' विश्वावसु ' है , यह कई नए संकेतों के साथ आ रहा है। संभव है देश को मध्यावधि चुनाव भी झेलना पड़े। राहू के स्वामित्व वाला व शुक्र के नेतृत्व वाला यह वर्ष क्या गुल खिलाएगा , आइए करते हैं इसका विश्लेषण :-
23 मार्च , 2012 , शुक्रवार यानी चैत्रमास के शुक्लपक्ष की प्रथम तिथि। नए संवत्सर 2069 का प्रथम दिवस। इस नवीन श्री संवत का नाम है ' विश्वावसु ', जिसके अधिष्ठाता ग्रह राहू हैं। राहू , जो अपनी विपरीत विचारधारा , अपार मानसिक क्षमता और नकारात्मक प्रवृत्ति के लिए जाने और पहचाने जाते हैं , ज्योतिष में उन्हें पापी ग्रहों में शुमार किया जाता है।
नए संवत ' विश्वावसु ' के राजा और मंत्री दोनों पदों पर इस बार दैत्य गुरु श्री शुक्र देव जी महाराज आसीन हैं , जो आनंद , ऐश्वर्य , प्रेम , स्त्री-पुरुष संबंधों और भौतिक प्रवृत्ति के स्वामी हैं। नवीन वर्ष पिछले संवत ' क्रोधी ' से थोड़ा सा भिन्न प्रतीत हो रहा है। शुक्रदेव के नेतृत्व वाला यह वर्ष लोगों के हृदय में प्रेम उत्पन्न करने की कोशिश तो करेगा। साथ ही स्वामी ग्रह के कौशल से इस वर्ष में अलग-अलग तरह की परिस्थितियां उत्पन्न होंगी , जो निश्चित तौर पर आम और खास दोनों को प्रभावित करेंगी।
नए वर्ष में भौतिक प्रवृत्ति का बोल-बाला रहेगा। जनमानस की भौतिक आकांक्षाओं में बढ़ोतरी का योग है। कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण महंगाई के बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। संपत्ति में कुछ तेजी नजर आ रही है। सफेद वस्तु जैसे शक्कर , चांदी इत्यादी के उत्पादन या सप्लाई में बढ़ोतरी तथा कीमतों में कुछ कमी के लक्षण दिखाई दे रहें हैं। आकाशीय मंत्रिमंडल में शुक्र की प्रभुता इस पूरे साल में आम आदमी को चैन नहीं लेने देगी।
तुला का शनि पश्चिमी देशों पर मंदी की चादर फैलाने के बाद भारत सहित अन्य देशों को भी अपने चंगुल में लेने की कोशिश तो करेगा पर वर्ष कुंडली में शनिदेव शुक्र के घर में , द्वितीय भाव में आसीन हैं और बृहस्पति मेष राशि में बैठकर शनि को पूर्ण दृष्टि से देख रहे हैं , इसलिए 15 मई तक जनमानस पर मंदी का बहुत बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इस वर्ष शुक्र और केतु की युति होने से अनाज के भावों में तेजी के संकेत मिलेंगे , लेकिन मीन में बुध होने से उत्तर दिशा में उत्पादन अच्छा होगा। रसीले फलों की पैदावार अच्छी रहेगी , लेकिन शुक्र के राजा होने से फसलों और फलों के नष्ट होने या नुकसान होने की बहुत अधिक संभावना रहेगी।
13 अप्रैल से सूर्य-गुरु की युति होने और शुक्र देव के मंत्री पद पर आसीन होने से कुछ राष्ट्रों में आपसी संबंधों में सुधार की प्रक्रिया सहसा तेज हो जाएगी। भारत की कुंडली के संबंध में बात करें , तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार में तेजी के संकेत हैं।
तुलसी का पौधा :महत्त्व
| Bakshi Richa Sumit Vaid |
तुलसी का पौधा होने से घर का वातावरण पूरी तरह पवित्र और कीटाणुओं से मुक्त रहता है। कभी-कभी किसी कारण से यह पौध सूख भी जाता है ऐसे में इसे घर में नहीं रखना चाहिए बल्कि इसे किसी पवित्र नदी में प्रवाहित करके दूसरा तुलसी का पौधा लगा लेना चाहिए। सुखा हुआ तुलसी का पौधा घर में रखना कई परिस्थितियों में अशुभ माना जाता है। इससे विपरित परिणाम भी प्राप्त हो सकते हैं। घर की बरकत पर बुरा असर पड़ सकता है। इसी वजह से घर में हमेशा पूरी तरह स्वस्थ तुलसी का पौधा ही लगाया जाना चाहिए।
तुलसी का धार्मिक महत्व तो है ही लेकिन विज्ञान के दृष्टिकोण से तुलसी एक औषधि है। आयुर्वेद में तुलसी को संजीवनी बुटि के समान माना जाता है। तुलसी में कई ऐसे गुण होते हैं जो बड़ी-बड़ी जटिल बीमारियों को दूर करने और उनकी रोकथाम करने में सहायक है। तुलसी का पौधा घर में रहने से उसकी सुगंध वातावरण को पवित्र बनाती है और हवा में मौजूद बीमारी के बैक्टेरिया आदि को नष्ट कर देती है। तुलसी की सुंगध हमें श्वास संबंधी कई रोगों से बचाती है। साथ ही तुलसी की एक पत्ती रोज सेवन करने से हमें कभी बुखार नहीं आएगा और इस तरह के सभी रोग हमसे सदा दूर रहते हैं। तुलसी की पत्ती खाने से हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता काफी बढ़ जाती है।
Wednesday, March 21, 2012
Navratra:Maan Durga Ke Nau Roop
Durga Shailputri (Daughter of Mountain) शैलपुत्री
She is a daughter of Himalaya and first among nine Durgas. In previous birth she was the daughter of Daksha. Her name was Sati – Bhavani. i.e. the wife of Lord Shiva. Once Daksha had organized a big Yagna and did not invite Shiva. But Sati being obstinate, reached there. Thereupon Daksha insulted Shiva. Sati could not tolerate the insult of husband and burnt herself in the fire of Yagna. In other birth she became the daughter of Himalaya in the name of Parvati – Hemvati and got married with Shiva. As per Upnishad she had torn and the egotism of Indra, etc. Devtas. Being ashamed they bowed and prayed that, “In fact, thou are Shakti, we all – Brahma, Vishnu and Shiv are capable by getting Shakti from you.”
ब्रह्मचारिणी :Brahmacharini
The second Durga Shakti is Brahamcharini. Brahma that is who observes penance(tapa) and good conduct. Here “Brahma” means “Tapa”. The idol of this Goddess is very gorgeous. There is rosary in her right hand and Kamandal in left hand. She is full with merriment. One story is famous about her. In previous birth she was Parvati Hemavati the daughter of Himvan. Once when she was busy in games with her friends. Naradaji came to her and predicted seeing her Palm-lines that, “You will get married with a naked-terrible ‘Bhole baba’ who was with you in the form of Sati, the daughter of Daksh in previous birth. But now you have to perform penance for him.” There upon Parvati told her mother Menaka that she would marry none except Shambhu, otherwise she would remain unmarried. Saying this she went to observe penance. That is why her name is famous as tapacharini – Brahmacharini. From that time her name Uma became familiar.
चंद्रघंटा :Chandraghanta
The name of third Shakti is Chandraghanta. There is a half-circular moon in her forehead. She is charmful and bright. She is Golden color. She has three eyes and ten hands holding with ten types of swords – etc. weapons and arrows etc. She is seated on Lion and ready for going in war to fight. She is unprecedented image of bravery. The frightful sound of her bell terrifies all the villains, demons and danavas.
कुष्मांडा: Kushmanda
Name of fourth Durga is Kushmanda. The Shakti creates egg, ie. Universe by mere laughing .She resides in solar systems. She shines brightly in all the ten directions like Sun. She has eight hands. Seven types of weapons are shining in her seven hands. Rosary is in her right hand. She seems brilliant riding on Lion. She likes the offerings of “Kumhde.” Therefore her name “Kushmanda” has become famous.
स्कंदमाता Skanda Mata
Fifth name of Durga is “Skanda Mata”. The daughter of Himalaya, after observing penance got married with Shiva. She had a son named “Skanda.” Skanda is a leader of the army of Gods. Skanda Mata is a deity of fire. Skanda is seated in her lap. She has three eyes and four hands. She is white and seated on a lotus.
कात्यायनी :Katyayani
Sixth Durga is Katyayani. The son of “Kat” as “Katya”. Rishi Katyayan born in this “Katya” lineage. Katyayan had observed penance with a desire to get paramba as his daughter. As a result she took birth as a daughter of Katyayan. Therefore her name is “Katyayani” . She has three eyes and eight hands. These are eight types of weapons missiles in her seven hands. Her vehicle is Lion.
कालरात्रि
Seventh Durga is Kalratri. She is black like night. Durga hairs are unlocked. She has put on necklaces shining like lightening. She has three eyes which are round like universe. Her eyes are bright. Thousands of flames of fire come out while respiring from nose. She rides on Shava (dead body). There is sharp sword in her right hand. Her lower hand is in blessing mood. The burning torch (mashal) is in her left hand and her lower left hand is in fearless style, by which she makes her devotees fearless. Being auspicious she is called “Shubhamkari.”
महागौरी :Maha Gauri
The Eighth Durga is “Maha Gauri.” She is as white as a conch, moon and Jasmine. She is of eight years old. Her clothes and ornaments are white and clean. She has three eyes. She rides on bull She has four hands. The above left hand is in “Fearless – Mudra” and lower left hand holds “Trishul.” The above right hand has tambourine and lower right hand is in blessing style. She is calm and peaceful and exists in peaceful style. It is said that when the body of Gauri became dirty due to dust and earth while observing penance, Shiva makes it clean with the waters of Gangas. Then her body became bright like lightening. There fore, she is known as “Maha Gauri” सिद्धदात्री:Siddhidatri
Ninth Durga us Siddhidatri. There are eight Siddhis , they are- Anima, Mahima, Garima, Laghima, Prapti, Prakamya, Iishitva & Vashitva. Maha Shakti gives all these Siddhies. It is said in “Devipuran” that the Supreme God Shiv got all these Siddhies by worshipping Maha Shakti. With her gratitude the half body of Shiv has became of Goddess and there fore his name “Ardhanarishvar” has became famous. The Goddess drives on Lion. She has four hands and looks pleased. This form of Durga is worshiped by all Gods, Rishis-Munis, Siddhas, Yogis, Sadhakas and devotees for attaining the best religious asset.
--------------------
Tuesday, March 20, 2012
स्वागत विक्रम संवत 2069 :22 मार्च 2012
हिन्दू पंचांग के अनुसार इस वर्ष २२ मार्च २०१२ गुरुवार को शाम ७ बजकर १० मिनिट को विक्रम संवत २०६९ का प्रारम्भ कन्या लग्न में हो रहा है .विश्वावसु नामक इस संवत्सर का स्वामी राहू है .भारतीय पंचांग और काल का निर्धारण इसी विक्रम संवत से किया जाता है . ऐसी पौराणिक मान्यता है कि आज से १ अरब ९७ करोड़ ३९ लाख ४९ हजार ११० वर्ष पूर्व सृष्टि के इस प्रथम दिन से ही ब्रह्माजी ने जगत ( ब्रह्माण्ड ) की रचना की थी .
नवरात्र का प्रथम दिन है . दक्षिण भारत में भी महान पराक्रमी राजा शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर अपने राज्य की स्थापना भी आज के दिन ही की थी . विश्व प्रसिद्ध , पांडव धर्मराज युधिष्टर ने भी अपने राज्य की स्थापना आज से ५१११ वर्ष पूर्व इसी दिन की थी .
नव वर्ष के दिन की शुरुआत अपने माता - पिता - बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर एवं मीठा खाकर करें . इस पवित्र दिवस पर अपने घरों पर नई ध्वजा ( पताका ) लगानी चाहिए . प्रातः काल विशेष सफाई के उपरांत तोरण , बंदनवार , फूलमाला आदि से सजा कर अपने गृह - मंदिर की पूजा घी के दीपक और शुद्ध धूप को जला कर करनी चाहिए . ( अगरबत्ती का प्रयोग शास्त्रानुसार निषिद्ध है क्योंकि इसके निर्माण में बांस का प्रयोग होता है और बांस में भगवान विष्णु का वास माना गया है ) आज से ही सार्वजनिक प्याऊ का प्रारम्भ भी करना चाहिए .
समस्त कुल देव - कुल देवी अति शुभ का आशीर्वाद प्रदान कर आपके - हमारे सम्पूर्ण परिवार , समाज , क्षेत्र , राष्ट्र व सम्पूर्ण विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करें , सद्बुद्धि विकसित करें , साहस और स्फूर्ति में वृद्धि करें , जननी जन्म भूमि के प्रति हमारे कर्तव्यों को जागृत करें .
Tuesday, February 21, 2012
तुमने कुछ नहीं कहा / अशोक लव
''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''
तुम्हारे चले जाने से पूर्व
तुमसे कितनी-कितनी बातें करनी थीं
कितना कुछ जानना था ।
तुम बोलने में असमर्थ थी
और मैं
वर्षों संग जिए क्षणों को जी लेना चाहता था
मृत्यु तुम्हारे सिरहाने मंडरा रही थी
मैं तुम्हें बताना चाहता था
पर बताने की सामर्थ्य कहाँ थी !
बता भी देता तो क्या होता !
विदा के क्षण और पीड़ामय हो जाते।
झूठे आश्वासनों को तुम सुनती थी
और मैं प्रतिदिन आश्वासन देता चला जाता था।
तुम्हारे सिर पर हाथ फेरते हुए
तुम्हारे अश्रु-कणों को पोंछते हुए
देखता था -
तुम्हारी आँखों में
फिर से मेरे साथ जीने की ललक के स्वप्न,
मेरे हाथों पर अभी भी है
तुम्हारे हाथों के कसाव की गर्माहट
पर विवशता थी
तुम्हें अकेले छोड़ने की
अस्पताल के अपरिचित डाक्टरों - नर्सों के पास।
कितने-कितने वर्षों के चित्र
आँखों के समक्ष तैरते
बेंच पर अकेले बैठे
अश्रुकणों के अविरल प्रवाहों के संग
तुम तैरती रहती मेरी स्मृतियों में।
एक-एक दिन आता
मैं हर पल मरता जाता
और जिस क्षण तुमने अंतिम श्वास लिए
और तुम्हारे हाथ का कसाव ढीला पड़ गया
तुम्हारे संग ही
मेरा संसार भी मर गया।
बस यही कसक लिए जीने की विवशता है
तुमने जाने से पूर्व कुछ नहीं कहा
कहती भी कैसे -
मुख पर लगी ट्यूब्स ने
तुम्हें बोलने ही नहीं दिया।
किसी के बिना कैसे जीवित रहा जा सकता है
किसी पुस्तक में नहीं लिखा है
तुम बोल सकती तो बता जाती।
Wednesday, February 8, 2012
AIM Conference-2012 Welcome
Saturday, February 4, 2012
New H-1B, F-1 US Visa Rules Soon.Spouse can work
US changing visa rules to attract the highly-skilled
Washington, Feb 4 (IANS) To make America more attractive to highly-skilled foreign students and workers, the United States has announced a series of reforms, including changes in the F-1 and H-1B visa rules, that may benefit professionals from India.
The interim measures are aimed at improving the competitiveness of US companies in the world market and stimulating US job creation before comprehensive immigration reforms for "fixing our broken immigration system," the Department of Homeland Security announced.
The proposed changes include providing work authorization for spouses of certain H-1B holders and allowing outstanding professors and researchers to present a broader scope of evidence of academic achievement.
Also proposed is expanding eligibility for 17-month extension of optional practical training (OPT) for F-1 international students to include students with a prior degree in Science, Technology, Engineering and Mathematics (STEM).
The changes would also allow for additional part-time study for spouses of F-1 students and expand the number of Designated School Officials (DSOs) at schools certified by DHS to enrol international students.
United States Citizenship and Immigration Services (USCIS) will launch Feb 22 its Entrepreneurs in Residence initiative with an Information Summit in Silicon Valley, California to discuss how to maximize current immigration laws' potential to attract foreign entrepreneurial talent.
The Information Summit will focus on ensuring that immigration pathways for
foreign entrepreneurs are clear and consistent, and better reflect today's business realities, the announcement said.
As a part of comprehensive immigration reform, President Barack Obama supports legislative measures that would attract and retain immigrants who create jobs and boost competitiveness here in the US, DHS said.
These include creating a "Startup Visa," strengthening the H-1B programme, and "stapling" green cards to the diplomas of certain foreign-born graduates in science, technology, engineering, and math (STEM) fields.
"Together these actions would help attract new businesses and new investment to
the US and ensure that the US has the most skilled workforce in the world," DHS said.

























