Sunday, October 11, 2009

फोटोग्राफ्स :मोहयाल यूथ कैम्प देहरादून अक्टूबर २००९

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*२
से ४ अक्टूबर तक देहरादून में आयोजित यूथ कैम्प के फोटोग्राफ्स।
श्री एन डी दत्ता जी के विषय में नीचे उनकी फ़ोटो के साथ सूचना पढ़ें।





२ से ४ अक्टूबर देहरादून में आयोजित यूथ कैम्प के फोटोग्राफ्स





मनीष बाली
गौतम मोहन और अन्य



यूथ कैम्प भ्रमण






श्री जे पी मेहता और अन्य


नरिंदर मेहता ( पानीपत ) और अन्य

राजीव छिब्बर और पी के दत्ता





श्री लाल मेहता

२ से ४ अक्टूबर देहरादून में आयोजित यूथ कैम्प के फोटोग्राफ्स।



श्री रमेश दत्ता
श्री एन डी दत्ता जी के जीवन का यह अन्तिम फंक्शन था। इसी ब्लॉग में उनके निधन का समाचार देखें।
**श्री एन डी दत्ता जी यूथ कैम्प से दिल्ली लौटे तो उन्हें ' पैरालैटिक-अटैक ' हो गया था । उनका दायाँ भाग काम नहीं कर रहा है। वे मैक्स हॉस्पिटल ( नई दिल्ली ) के आइ .सी.यू.में एडमिट हैं। वयोवृद्ध श्री एन डी दत्ता जी मोहयाल मित्तर के इंगलिश के संपादक हैं। हिन्दी के संपादक के रूप में उनके साथ कार्य करते हुए मुझे लगभग बीस वर्ष हो गए हैं। मैंने इसी माह यह पद छोड़ा है। मुझे उनका स्नेह सदा मिला है।
ईश्वर से प्रार्थना है वे श्री एन डी दत्ता जी को शीघ्र स्वस्थ करें। (२२ अक्टूबर २००९ )
*अशोक लव जी नमस्कार,
मैंने अभी-अभी 'जय मोहयाल ' ब्लॉग पर श्री दत्ता जी की बीमारी के
बारे में पढा .देहरादून में तो वे बिलकुल भले-चंगे थे , भगवान से
प्रार्थना है कि वे जल्दी से जल्दी ठीक होकर अपने परिवार में लौटें .
नरिंदर छिब्बर
पानीपत ( २४.१०.२००९)




कमल बाली बाँसुरी वादन करते हुए


















Saturday, October 10, 2009

कविता -- लड़की / अशोक लव

झट बड़ी हो जाती है लड़की
और ताड़ के पेड़ - सी लम्बी दिखने लगती है
उसकी आंखों में तैरने लगते हैं
वसंत के रंग-बिरंगे सपने
वह हवा पर तैर
घूम आती है
गली- गली , शहर - शहर
कभी छू आती है आकाश
कभी आकाश के पार
चांदी के पेड़ों से तोड़ लाती है
सोने के फल।

मन नहीं करता
उसे सुनाएँ
आग की तपन के गीत,
मन नहीं चाहता
उसकी आंखों के रंग-बिरंगे सपने
हो जाएँ बदरंग।

हर लड़की को लांघनी होती है दहलीज
और दहलीज के पार का जीवन
स्टापू खेलने
गुड्डे-गुड्डियों की शादियाँ अचने से अलग होता है
इसलिय आवश्यक हो जाता है
हर लड़की सहती जाए आग की तपन
खेलने के संग-संग
ताकि पार करने से पूर्व दहलीज
वह तप चुकी हो
और उसकी आंखों में नहीं तैरें
केवल वसंत के सपने।
''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''
*पुस्तक-अनुभूतियों की आहटें ( प्रकशन वर्ष -१९९७)

Friday, October 9, 2009

पानी के लिए चंद्रमा पर 'नासा' की आज बमबारी

चंद्रमा पर पानी की खोज के लिए नासा की योजना



An image from India's Chandrayaan-1 spacecraft shows the distribution of water-rich minerals around a small crater on the surface of the Moon, 24 Sep 2009
An image from India's Chandrayaan-1 spacecraft shows the distribution of water-rich minerals around a small crater on the surface of the Moon, 24 Sep 2009
अमेरिकी अन्तरिक्ष एजेंसी नासा ने चंद्रमा पर पानी की खोज करने की नयी योजना बनायीं है. इस योजना के तहत नासा का एक अंतरिक्षयान चंद्रमा की धरती पर टकराएगा.

नासा के अनुसार शुक्रवार को एक पुराना रॉकेट चंद्रमा के साउथ पोल पर गिरेगा जिसके कारण लूनर धूल का एक विशाल बादल तैयार हो जायेगा.

फिलहाल इस रॉकेट को एक खास उपग्रह से जोड़ा गया है, इस उपग्रह का नाम है लुनार क्रेटर ओबेर्सेर्वेशन एंड सेंसिंग सैटलाईट. रॉकेट के गिरने के बाद यह उपग्रह उसके पीछे जायेगा और बाद में तैयार हुए लुनर धूल के बादल की चिकित्सा करेगा. यह देखने का प्रयास किया जायेगा कि क्या इस बादल में पानी या बरफ मौजूद है.

यह उपग्रह इस टक्कर के ,और बाद में होने वाली हर घटना के चित्र धरती पर नासा के केंद्र में भेजता रहेगा.

नासा का कहना है कि कुछ ही समय में वैज्ञानिकों को इस बात का पता चल जायेगा की क्या चंद्रमा पर पानी मौजूद है.

नासा के अधिकारियों का कहना है कि अगर चंद्रमा पर पानी मौजूद है तो चन्द्र की खोज से जुड़ी योजना को गति प्राप्त होगी. चंद्रमा पर अन्तरिक्ष यात्रियों को दोबारा भेजने की नासा की योजना है.

Thursday, October 8, 2009

हमें वेंकटरमन रामकृष्णन पर गर्व है

भारतीय-अमेरिकी रामकृष्णन को रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार



भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक वेंकटरमन रामकृष्णन को वर्ष २००९ के नोबेल पुरस्कार के लिये चुना गया है. रसायन विज्ञान में अनुसंधान के लिये उन्हें ये सम्मान दिया जायेगा.

श्री वेंकटरमन और दो अन्य वैज्ञानिकों को नये प्रतिरक्षियों के विकास और रॉइबोसोम्स पर उनके द्वारा किये गये ऐतिहासिक कार्य के लिये इस वर्ष का नोबेल पुरस्कार दिया जायेगा.

श्री वेंकरमन मंदिरों के लिये प्रसिद्ध तमिलनाडु के चिदंबरम जिले से आते हैं. 57 वर्षीय वेंकटरमन को अमेरिका के थॉमस स्टीट्ज और इज़रायल के ऐडा योनाथ के साथ संयुक्त रूप से इस पुरस्कार के लिये चुना गया है.

रॉयल स्वीडिश अकादमी ने कहा, "रॉइबोसोम्स पर उनके शोध से वैज्ञानिकों को नये प्रतिरक्षियों का विकास करने में सहायता मिलेगी जिससे लोगों की जिंदगियां बचाई जा सकेंगी."

Wednesday, October 7, 2009

मोहयाल सभा अमृतसर के नए पदाधिकारी

List of the new Executive Body of Mohyal Sabha, Amritsar


1) Patron (i) Sh. Tarlok Singh Dutta (9814070857)

(ii) Sh. Kuldip Dutta (9988602482)

(iii) Sh. Mohan Dutta (9217829658)

2) President Sh. Davinder Bali (9815711424)

3) Senior Vice President Sh. Anil Dutta (9878391830)

4) Vice President Sh. Raj Kumar Bakshi (9876592832)

5) General Secretary Sh. Subash Bali (9814431400)

6) Asstt. Secretary Sh. Inderjit Dutta (9463650809)

7) Finance Secretary Sh. Mukesh Vaid (9814518767)

8) Asstt Finance Secretary Sh. Madan Mohan Vaid

9) Organizing Secretary Sh. Parbodh Bali (9417010035)

10) Secretary Youth Affairs Sh. Sunil Dutta (9815968196)

11) Secretary Mahilla Wing Smt. Mamta Dutta (MC) (9872947018)

12) Asstt. Secretary Mahilla Wing Smt. Sunita Bali (9814431400)

13) In-charge Matrimonial Cell Smt. Vandana Dutta (9878391830)

14) Secretary Matrimonial Cell Smt. Darshna Mehta (9872422694)

15) PRO Sh. Puneet Dutta (9216777730)

बालिकाएँ जन्म लेती रहेंगी / अशोक लव ( भ्रूण हत्या के विरूद्ध कविता )


माँ !आई थी मैं तुम्हारी कोख में
समेटे हृदय में स्वप्न , इच्छाएँ

देखने की लिए कामनाएँ
तुम्हारे संसार को ।
तुम्हारी साँसों के संग जुडी थीं
मेरी साँसें
तुम्हारी देह के संग जुडी थी
मेरी देह
पल रही थी मैं
बढ़ रही थी मैं
तुम्हारी कोख में धीरे-धीरे ।
सहलाती थी जब तुम
अपने ममता भरे हाथों से
छू लेना चाहती थी आकुल होकर
तुम्हारी उंगलियाँ।

माँ !
तुमने अपनी कोख में रखा मुझे
और निभाए उत्तरदायित्व घर के ,
कार्यालय के
कितना कठिन होता है गर्भावस्था में
कार्य करना ।

कोख से बहार आकर
आजीवन करूँगी तुम्हारी सेवा
तुमने जन्म देकर
मुझ पर चढ़ाया था जो ऋण
उसे उतरने का करूँगी प्रयास।

माँ !
तुमने नहीं लेने दिया जन्म मुझे
और कर डाला अपावन माँ शब्द को
तुम्हारे संसार में है नारी की हत्यारिन
नारी ही
करती है प्रताड़ित नारी को
नारी ही
भुला देती है नारीत्व , ममत्व
यद्यपि वह स्वयं होती है
किसी की पुत्री
किसी की माँ ।
माँ ! क्यों लगती हैं पहाड़ के बोझ - सी
पुत्रियाँ ?
क्यों जला दी जाती हैं
दुल्हनें ?
क्यों कर दिया जता है तार- तार
उनका झिलमिलाता स्वप्निल संसार ?
प्रताड़ित पुत्रियाँ
लौट आती हैं उस आँगन में
जहाँ से हुई थीं विदा धूमधाम से
संग लाती हैं उदासियाँ , पीड़ाएँ , टूटन , बिखराव
भिगो देती हैं अश्रुओं से
माता-पिता के कमज़ोर कंधे ।

माँ !
सामाजिक परम्पराओं के भयावह रूप को देखकर
कांपा होगा तुम्हारा हृदय
न जलाई जाऊं और न की जाऊं प्रताड़ित
न बनूँ कामी पुरुषों की कामांधता की शिकार
न कर सके कोई बलात्कारी मेरी हत्या
शायद इसीलिये तुमने ही कर डाली
मेरी हत्या !

माँ !
कैसा था मेरा भाग्य
नहीं जलाया मुझे किसी ने
न हुई शिकार किसी कामी की वासना की
कर डाली तुमने ही मेरी ह्त्या !

माँ !
कैसे जुटाया होगा साहस ?
कैसे विजयी हुई होगी ममता पर क्रूरता ?
क्या क्षण भर के लिए भी नहीं कांपा होगा
तुम्हारा हृदय ?

माँ !
क्या पता बनती तुम्हारी पुत्री वीरांगना -- झाँसी की रानी - सी
क्या पता उड़ जाती करने स्पर्श
अन्तरिक्ष की हवाओं का ,
क्या पता कंप्यूटर पर चलकर उसकी उंगलियाँ
कर डालती विश्व को चमत्कृत ,
क्या पता उसके भावुक हृदय से
सर्जित हो जाता महाकाव्य ,
क्या पता उठ खड़ी होती वह कुरीतियों के विरुद्ध
और बदल डालती सामाजिक परिदृश्य !

माँ !
तुमने तो क्षण भर में ही मिटा डाला
मेरा अस्तित्व
मैं न देख सकी सूर्योदय की लालिमा
मैं न देख सकी सूर्यास्त की थकी किरणें
न भीग सकी चाँदनी में
न छू सकी ओस-मुक्ताओं से झिलमिलाती पंखुडियाँ
न सुन सकी परियों की कहानियाँ
न करा सकी गुड्डे-गुड़िया का विवाह ।

माँ !
मैं आती तो संग लाती परी-लोक, किलकारियां
छुपन-छुपाई , तुतलाते बोल
बहती तुम्हारे आँगन में में खुशियों के कल-कल झरने
तुमने देखने नहीं दिया
अपनी गुड़िया-सी पलकें झपकती
मंद-मंद मुस्काती बेटी को
कोख से बाहर का संसार
केवल इसलिए की वह बालिका थी , बालक नहीं !

माँ !
तुम स्वयं को भूल गई
तुम भी बालिका थी
पर नहीं की थी
तुम्हारी माँ ने
तुम्हारी हत्या ,
दिया था तुम्हें जन्म
दिया था तुम्हें जिंदा रहने का ,
जीने का अधिकार ।

माँ !
मैं लूंगी जन्म अवश्य
आऊँगी इस धरती पर बालिका के रूप में ,
बालिकाएँ लेती रहेंगी जन्म
बार-बार मरे जाने के बावजूद
क्योंकि
बालिकाएँ होती हैं तपती हवाओं में बारिश की ठंडक
उनकी हँसी से झंकृत हो जाती हैं संगीत लहरियाँ
तितलियों - सी उछलती - कूदती बालिकाएँ
बिखेर देती हैं परिवेश में रंगों की छटाएँ।

माँ !
नहीं होगी बालिकाएँ तो नहीं बजेंगे
रुनझुन-रुनझुन घुँघरू ,
न स्पंदित होगी धरती ,
न झूमेगा आकाश
इसलिए मैं अवश्य जन्म लूँगी
किसी न किसी की कोख से !
''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''
@सर्वाधिकार सुरक्षित
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कवि से अनुमति अवश्य लें।