Saturday, February 7, 2009
भगवान पर विश्वास करें / मंजु दत्ता
The four blessed looks: Look back and thank God. Look forward and trust God. Look around and serve God. Look within and find God!' 'I asked God, 'How do I get the best out of life?' God said, 'Face your past without regrets. Handle your present with confidence. And prepare for the future without fear!'' 'Without God, our week is: Mournday, Tearsday, Wasteday, Thirstday, Fightday, Shatterday and Sinday. So, allow Him to be with you every day!' 'Time is like a river. You cannot touch the same water twice, because the flow that has passed will never pass again...' Enjoy every moment of life. Be Blessed!!!!
Thursday, February 5, 2009
अमृतसर में मोहयालों ने गणतंत्र - दिवस मनाया
कैप्टन वरुण छिब्बर का असामयिक निधन
स्वर्गीय वरुण छिब्बर भारतीय सेना में कैप्टन थे। वे विवाह कराने के लिए अपने घर , फ्लैट- ५७१,सेक्टर-२८,नोयडा आ रहे थे । दुर्भाग्यवश वे पहाड़ से ३०० मीटर नीचे गहरे गिर गए और वहीं उनका निधन हो गया।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को सद्गति दें। परिवारजन को जो गहरा आघात लगा है ,पूरा मोहयाल समाज इस आघात को सहन करने की ईश्वर से प्रार्थना करता है।
-कमल बाली- 9811790785- (महरौली ) द्वारा यह दुखद समाचार मिला।
kamal bali: 9811790785
Wednesday, February 4, 2009
बाबा ठक्कर महाराज की समाधि गुरदासपुर
बाबा ठक्कर महाराज दत्तों (दत्त ) के जठेरे हैं। इनकी समाधि गुरदासपुर (पंजाब) में है। वसंत-पंचमी के दिन इनकी समाधि पर मेला लगता है।
अमृतसर से श्री अनिल दत्ता ने यह फोटोग्राफ भेजा है। उनके अनुसार -'विश्व के कोने- कोने में रहने वाले दत्त बाबा ठक्कर महाराज की समाधि क दर्शन कर लें इसलिए यह फोटोग्राफ भेज रहा हूँ।'
*अनिल दत्ता
खाली पेट पानी पीकर स्वस्थ रहें / *मंजू दत्ता
DRINK WATER ON EMPTY STOMACH
It is popular in Japan today to drink water immediately after waking up every morning. Furthermore, scientific tests have proven a its value. We publish below a description of use of water for our readers. For old and serious diseases as well as modern illnesses the water treatment had been found successful by a Japanese medical society as a 100% cure for the following diseases:
Headache, body ache, heart system, arthritis, fast heart beat, epilepsy, excess fatness, bronchitis asthma, TB, meningitis, kidney and urine diseases, vomiting, gastritis, diarrhea, piles, diabetes, constipation, all eye diseases, womb, cancer and menstrual disorders, ear nose and throat diseases.
METHOD OF TREATMENT
1.. As you wake up in the morning before brushing teeth, drink 4 x 160ml glasses of water
2.. Brush and clean the mouth but do not eat or drink anything for 45 minute
3.. After 45 minutes you may eat and drink as normal.
4.. After 15 minutes of breakfast, lunch and dinner do not eat or drink anything for 2 hours
5.. Those who are old or sick and are unable to drink 4 glasses of water at the beginning may commence by taking little water and gradually increase it to 4 glasses per day.
6.. The above method of treatment will cure diseases of the sick and others can enjoy a healthy life.
The following list gives the number of days of treatment required to cure/control/ reduce main diseases:
1.. High Blood Pressure - 30 days
2.. Gastric - 10 days
3.. Diabetes - 30 days
4.. Constipation - 10 days
5.. Cancer - 180 days
6.. TB - 90 days
7.. Arthritis patients should follow the above treatment only for 3 days in the 1st week, and from 2nd week onwards - daily.
This treatment method has no side effects, however at the commencement of treatment you may have to urinate a few times. It is better if we continue this and make this procedure as a routine work in our life.
Drink Water and Stay healthy and Active.
This makes sense .. The Chinese and Japanese drink hot tea with their meals ...not cold water. Maybe it is time we adopt their drinking habit while eating!!! Nothing to lose, everything to gain... For those who like to drink cold water, this article is applicable to you.
It is nice to have a cup of cold drink after a meal. However, the cold water will solidify the oily stuff that you have just consumed. It will slow down the digestion. Once this "sludge" reacts with the acid, it will break down and be absorbed by the intestine faster than the solid food. It will line the intestine. Very soon, this will turn into fats and lead to cancer. It is best to drink hot soup or warm water after a meal.
A serious note about heart attacks: Women should know that not every heart attack symptom is going to be the left arm hurting. Be aware of intense pain in the jaw line. You may never have the first chest pain during the course of a heart attack. Nausea and intense sweating are also common symptoms. 60% of people who have a heart attack while they are asleep do not wake up. Pain in the jaw can wake you from a sound sleep. Let's be careful and be aware. The more we know, the better chance we could survive...
A cardiologist says if everyone who gets this mail sends it to everyone they know, you can be sure that we'll save at least one life।
प्रस्तुति- मंजु दत्ता

प्रसिद्ध मंगला - माई मन्दिर का मोहयालों के लिए तीर्थ-यात्रा करने -सा महत्त्व था। यह मन्दिर कोटला दत्तां (जिला-झेलम ) से लगभग १४ मील झेलम-मीरपुर रोड पर स्थित था। यह मन्दिर माता वैष्णो देवी के समान प्रसिद्ध और पावन था।श्री नरिंदर कुमार वैद (लुधियाना ) के अनुसार उनके पिता विभाजन के बाद इसी गाँव से भारत आए थे। उन्होंने बताया था कि इस मन्दिर में उनके परिवार के बच्चों के और अन्य मोहयालों के बच्चों के मुंडन हुआ करते थे।
पाकिस्तान सरकार ने झेलम नदी पर बाँध बना दिया है। सारा मीरपुर गाँव तथा यह मन्दिर बाँध के जल में डूब गया है।
मीरपुर शहर नए स्थान पर बसा दिया गया है पर यह मन्दिर डूब गया है।
फोटोग्राफ्स में सारा दृश्य सामने है।
*श्री नरिंदर कुमार वैद , nkvaid2@rediffmail.com
Tuesday, February 3, 2009
श्री रमेश दत्ता (फरीदाबाद) सम्मानित

फरीदाबाद के सुप्रसिद्ध समाजसेवी श्री रमेश दत्ता को २६ जनवरी २००९ को सम्मानित किया गया । मोहयाल सभा फरीदाबाद के अध्यक्ष हैं ।वे अनेक सामाजिक संस्थाओं के साथ जुड़े हुए हैं ।
गणतंत्र - दिवस के अवसर पर " फ्रेंड सोशल वर्कर " संस्था की ओर से रंगारंग सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया गया था। बच्चों की ओर से देशभक्ति के गीत गाए गए।
" फ्रेंड सोशल वर्कर " के अध्यक्ष श्री दौलत राम चड्ढा ने श्री रमेश दत्ता के सामजिक कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि
फरीदाबादवासियों को उन पर गर्व है । वे सच्चे समाजसेवी हैं । वे ज़रूरतमंदों की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहते हैं । हमारी संस्था उनका सम्मान करके स्वयं सम्मानित हुई है । वे इसी तरह तन-मन-धन से धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं की सेवा करते रहें ।
श्री विनय चौधरी (सुपुत्र श्री ऐ सी चौधरी ,मंत्री- शहरी निकाय, औद्योगिक प्रशिक्षण ,वोकेशनल एजुकेशन, श्रम एवं रोज़गार ,हरियाणा सरकार ) ने तिरंगा फहराया ।
श्री विनय चौधरी, श्री दौलत राम चड्ढा और श्री चेतल ने उन्हें स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर फरीदाबाद के अनेक मोहयाल भी उपस्थित थे । इनमें उल्लेखनीय थे - श्री विनय बक्षी, श्री बलराम दत्ता और श्री ध्रुव दत्ता । ' मोहयाल सभा फरीदाबाद ' के पदाधिकारियों ने श्री रमेश दत्ता को बधाई दी ।
श्री रमेश दत्ता का शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान है । वे ब्लू बर्ड सीनियर सैकेंडरी स्कूल के निर्देशक हैं। उनकी पत्नी श्रीमती सुमन दत्ता इस स्कूल की प्रिंसिपल हैं।
चित्र में ब्लू बर्ड स्कूल के विद्यार्थी मोहयाल दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हुए।
" जय मोहयाल " परिवार की ओर से श्री रमेश दत्ता को बधाई !
Thursday, January 29, 2009
योगेश मेहता :जन्म-दिन पर हार्दिक शुभकामनाएँ
समीक्षा :अशोक लव द्वारा मानवीय चेतना को झकझोरने का प्रयास / * डॉ कंचन छिब्बर
संग्रह का मुख्य स्वर समाजोन्मुखता का है। प्रथम तीन खंडों - नारी , संघर्ष और चिंतन में यथार्थ के प्रति सावधान रहने का आग्रह और भविष्य को संवारने की ललक स्पष्ट दिखाई देती है।
'नारी' खंड में ' माँ और कविता ', 'आशीर्वादों की कामधेनु ',नारी के मातृरूप की वंदना है तो 'बालिकाएँ जन्म लेती रहेंगी ' और 'करतारो सुर्खियाँ बनाती रहेंगी ' इक्कीसवीं सदी की नारी - दुर्दशा की वास्तविक कारुणिक कथा हैं जो गाहन विचारणा को उत्पन्न करती हैं। परिस्थितियों के प्रति सकारात्मक विरोध दर्ज़ कराती इस खंड की अन्य कविताएँ ,विशेषत: शीर्षक कविता लड़कियाँ छूना चाहती हैं आसमान' तथा 'द्रौपदी' अशोक लव की जागरुक काव्य-दृष्टि की परिचायक हैं।
'संघर्ष ' खंड की कवितायेँ समक्ष उपस्थित सामाजिक और राजनीतिक परिवेशगत कथ्यों के संसार को सहृदयों के सामने प्रस्तुत करती हैं। इस खंड की सभी कविताएँ ऐसी ही हैं लेकिन 'मारा गया एक और' तथा 'मारा गया एक खास ' लाजवाब हैं,बेमिसाल हैं।
'चिंतन' खंड में जीवन के बहुपक्षीय चिंतन हैं। 'हम दोनों फिर मिले ' का सहज सौंदर्य ध्यातव्य है ।
'प्रेम' खंड की कविताओं में छायावादी सौन्दर्य -अनुभूति के दर्शन होते हैं । 'देह-दीपोत्सव' इस खंड की श्रेष्ठतम कविता कही जा सकती है। यह ऐंद्रिकता से परे प्रार्थना के संसार में ले जाती है। 'दिनकर' का 'काम- अध्यात्म' इस कविता से पुनः स्मृत हो जाता है।
अभिव्यक्ति-पक्ष की बात है, इसमें रचनाकार काम विशेष आग्रह दिखाई नहीं पड़ता। स्वाभाविकता के प्रवाह में अनायास ही शैली ,बिम्ब,अलंकार आदि जो शिल्प -मुक्त-माणिक्य बहते चले आए हैं ,कवि ने उन्हें संजो लिया है । इसी प्रकार उद्देश्य एवं संप्रेषणयीता में सहायक शब्दावली में भाषिक साग्रहता नहीं है। आम बोलचाल,पंजाबी,अंग्रेजी के प्रचलित शब्दों के साथ ही परिष्कृत संस्कृतगर्भित भाषा भी प्रयुक्त हुई है। ' परम्पराओं के पत्थर ' , ' पसीने की स्याही ' काम रूपक हो या 'संजीवनी का स्पर्श ' में उपमा अलंकार , सब अनायास आए हैं।
' लड़कियाँ छूना चाहती हैं ' की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बिम्बात्मकता है। चित्रात्मकता का यह गुण सर्वत्र उपलब्ध है । ' आशीर्वादों की कामधेनु ' में पौराणिक बिम्ब क्या नहीं कह जाता ! 'पसीने की स्याही ' का सामाजिक बिम्ब या फिर ' परम्पराओं के पत्थर ' का सांस्कृतिक बिम्ब दर्शाते हैं कि किस प्रकार अशोक लव ने वातावरण-निर्माण के लिए सर्जनात्मक काल्पनिकता के सार्थक प्रयोग किए हैं ।
इसी क्रम में यदि अप्रस्तुत - विधान की बात की जाए तो सादृश्य - आधृत अप्रस्तुत-विधान के चारों रूप - मूर्त के साथ मूर्त का संयोजन ,मूर्त के साथ अमूर्त का संयोजन , अमूर्त के साथ मूर्त का संयोजन और अमूर्त के साथ अमूर्त का संयोजन , संग्रह में दिखाई देते हैं ।
' लड़कियाँ छूना चाहती हैं आसमान ' पठनीय एवं संग्रहणीय कृति है । परिपक्व कृतिकार अशोक लव का यह काव्यात्मक प्रयास सार्थक एवं प्रशंस्य है । यह कविता के दायित्वों को स्पष्ट रेखांकित करने में समर्थ है -
" सूरज के आगे अंधेरों की
कितनी ही चादरें तान लें
कर देता है सूरज उन्हें तार-तार
अपनी रोशनी से;
उन्हें शिकायत है कि
कविता सूरज क्यों है ।
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*समीक्षक :डॉ कंचन छिब्बर ( आगरा ) *पुस्तक- लड़कियाँ छूना चाहती हैं आसमान
*कवि- अशोक लव ,फ्लैट-३६३,सूर्य अपार्टमेंट ,सेक्टर-६,द्वारका , नई दिल्ली-११००७५ * पृष्ठ -११२, *मूल्य-१००/रु ,प्रकाशन-वर्ष : २००८
Wednesday, January 28, 2009
एन आर आई यानी प्रवासी भारतीय : ज़रूरी जानकारी
रोजगार पाने या अपना बिजनेस चलाने के लिए, निश्चित या अनिश्चित समय के लिए भारत से बाहर जो भारतीय नागरिक रहते हैं उन्हें अप्रवासी भारतीय माना जाता है। (एक व्यक्ति जिसे केंद्र या राज्य सरकार द्वारा संयुक्त राष्ट्र में या विदेशों में भेजा जाता है या जो व्यक्ति पब्लिक अंडरटेकिंग कंपनियों में करार के तहत काम करने विदेश जाता है वह भी इस श्रेणी में आता है। ) अप्रवासी भारतीय जिन्हें विदेशी नागरिकता प्राप्त है, को भी लगभग वही सुविधाएं प्राप्त होंगी जो अप्रवासी भारतीयों को।
क. भारत में बैंक आउंट खुलवाने शेयर और सेक्यूरिटी बांड में निवेश करने में सुविधा प्रदान करने के मद्देनजर - एक विदेशी नागरिक(पाकिस्तान और बांग्लादेश के नागरिकों को छोड़कर) को निम्नंकित शर्तो पर भारतीय मूल का माना जा सकता है-
1. वह भारतीय पासपोर्ट धारक हो।
2. भारतीय संविधान की धाराओं तथा नागरिकता अधनियम 1955 के अनुसार किसी व्यक्ति के अभिभाव या उसके पूर्वज भारतीय नागरिक रहे हों।
नोट:- भारत या भारतीय मूल के नागरिक की पत्नी(पाकिस्तान और बांग्लादेश के नागरिकों को छोड़कर) को भी भारतीय नागरिक का दर्जा दिया जाएगा। लेकिन इन्हें बैंक काउंट खोलने, शेयर, सेक्यूरिटी बांड खरीदने जैसे कार्य अपने प्रवासी भारतीय पत्नी के साथ ही करना होगा।
ख.- अचल संपत्तियों में निवेश के लिए विदेशी नागरिक (पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, भूटान, श्रीलंका और नेपाल के नागरिकों को छोड़कर) भारतीय नागरिकता प्राप्त कर सकता है, अगर-
3. वह भारतीय पासपोर्ट धारक हो।
4. भारतीय संविधान या 1955 के नागरिकता अधिनियम के तहत उसके माता-पिता या पूर्वज भारतीय नागरिक रहे हों।
इसका मतलब ओवरसीज कारपोरेट बॉडिज एक ऐसी संस्थान है जिसका किसी भारतीय या भारतीय मूल के व्यक्ति द्वारा 60 प्रतिशत से अधिक संपत्ती का स्वामित्व हो अप्रवासी भारतीयों को दी जाने वाली सारी सुविधाएं ओसीबी को तब तक प्राप्त होंगी जब तक कि उनका संस्थान पर स्वामित्व रहेगा तथा उनकी संस्था लाभ कमाने की स्थिति में रहेगी।
भारत में पैसे केवल सामान्य बैंकिंग चैनल द्वारा ही किया जा सकता है। हालांकि खाड़ी क्षेत्रों में स्थित एक्सचेंज हाउस को भी भारत में पैसे भेजने का अधिकार दिया गया है। इसके लिए उसे डिमांड ड्राफ्ट, मेल ट्रांसफर और टेलिग्राफिक आर्डर जैसे माध्यमों को अपनाना होगा।
अप्रवासी भारतीय जिन बैंक खातों का प्रयोग कर सकते हैं उन्हें निमनंकित शीर्षकों में सूचीबद्ध कर सकते हैं:-
क. वर्गीकरण का आधार बैंक खाता की मुद्रा होनी चाहिए।
1. भारतीय रुपया
2. विदेशी मुद्रा खाता
ख. फंड के आधार पर वर्गीकरण
अप्रवासी भारतीय किसी भी बैंक में खाता खुलवाने के लिए स्वतंत्र हैं। इसके लिए किसी भी बैंक से अग्रिम अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
Tuesday, January 20, 2009
समीक्षा -' लडकियां छूना चाहती हैं आसमान ' /*समीक्षक-रश्मि प्रभा
अशोक लव जी से मेरे परिचय का माध्यम उनका ब्लॉग बना - "लडकियां छूना चाहती हैं आसमान" विषय ने मुझे आकर्षित किया। लड़कियों के प्रति आम मानसिकता हमसे छुपी नहीं है.....उससे अलग उनकी ख्वाहिशों को किसने परिलक्षित किया , यह जानने को मेरे कदम उधर बढे,
'बेटियाँ होती ठंडी हवाएं
तपते ह्रदय को शीतल करनेवाली,
बेटियाँ होती हैं सदाबहार फूल ,
खिली रहती हैं जीवन भर .....'
मैं मुग्ध भाव लिए पढ़ती गई और अपने विचार भी प्रेषित किए, मेरी खुशी और बढ़ी,जब मैंने उन्हें ऑरकुट पर भी
पाया और विस्तृत रूप से उनकी उपलब्धियों के निकट आई।
इनको पढ़ते हुए लगा , समाज की संकीर्ण मानसिकता के आगे लड़कियों की महत्वकांक्षा को इन्होने बखूबी परिलक्षित किया है;
' लडकियां
अपने रक्त से लिख रही हैं
नए गीत
वे पसीने की स्याही में डुबाकर देह
रच रही हैं
नए ग्रन्थ !'
लड़कियों की खुद्दारी को परिभाषित करती हैं,वरना पूर्व समाज का ढांचा था,
'पुत्रियाँ होती हैं जिम्मेदारियाँ
जितनी जल्दी निपट जाए जिम्मेदारियाँ
अच्छा रहता है..........'
दर्द का एक आवेग उभरता है इन पंक्तियों में -
'पिता निहारते हैं उंगलियाँ
जिन्हें पकड़कर सिखाया था
बेटियों को टेढ़े - मेढ़े पाँव रखकर चलना...........
कितनी जल्दी बड़ी हो जाती हैं बेटियाँ '
कविताओं की यात्रा के दौरान मुझे लगा कि आए दिन की घटनाओं से इनकी निजी ज़िन्दगी भी प्रभावित होगी, यानी किसी बेटी कि ज़िन्दगी का कोई पक्ष और अपने विचारों कि रास थामकर मैंने पूछ ही लिया........मुझे बहुत खुशी हुई ,जब मैंने जाना कि इनको तीन तीन पुत्रियाँ (ऋचा,पल्लवी,और पारुल),इनके विचारों का उज्जवल प्रवाह हैं, काव्य का स्तम्भ हैं ।
इनकी सूक्ष्म विवेचना इनके सूक्ष्म संवेदनशील मन को दर्शाता है,जो समाज के घृणित घेरे से निकलकर लड़कियों के आसमानी ख्यालों को,उनकी ऊँची उड़ान को शब्दों की बानगी देता है।
अशोक जी ने स्त्री के हर रूप को सामाजिक कैनवास पर उतारा है और विभिन्न विशिष्ट रंगों से संवारा है - माँ के रूप को चित्रित करते हुए कहा है;
'माँ !
उर्जावान प्रकाशमय सूर्य-सी
रखती आलोकित दुर्गम पथ
करती संचरित हृदयों में
लक्ष्यों तक पहुँचने की ऊर्जा !'
एक युवती,एक बहन,एक पत्नी को शब्दों की अद्भुत बानगी दी है।
भ्रूण ह्त्या के ख़िलाफ़ भी एक लडकी को दृढ़ता दी है -
' माँ !
तुम स्वयं को भूल गई,
तुम भी बालिका थी,
पर नहीं की थी
तुम्हारी माँ ने तुम्हारी ह्त्या
दिया था तुम्हे जन्म
दिया था तुम्हे ज़िंदा रहने का,
जीने का अधिकार !'
इसी समाज का कवि भी है,पर अपनी कलम को तलवार बनाकर पुरुषों की मानसिकता पर हर तरह से वार किया है,जो वन्दनीये है। मन के हर भावों को प्रस्तुत करते हुए , अपनी लम्बी यात्रा के हर अनुभव को सार्थक बनाया है। सत्य का पुट हर कविता में है , जिसने स्त्री के हर दर्द और निश्चय को चित्रमान कर दिया है । दुःस्वप्न और वर्तमान के अंतःकरण में खुले आकाश को विस्तार दिया है। सृजन के क्षणों में अचेतन का दर्द अधिक मुखर है,हर कविता जीवंत लगती है;
'बेटियाँ होती हैं मरहम
गहरे-से-गहरे घाव को भर देती हैं
संजीवनी स्पर्श से ...........
लडकी के कोमल स्वरुप को दर्शाती है !.....................मातृत्व को कवि ने 'कविता' का दर्जा दिया है,
'माँ की देह से सर्जित देहें
उसकी कवितायें हैं
बहुत अच्छी लगती हैं माँ को
अपनी कवितायें !'
संघर्ष का ताना-बाना रचते हुए कवि ने नारी की जिजीविषा को एक सांकेतिक स्वरुप में पिरोया है;
'तपती है मोम
आग बन जाती है
चिपककर झुलसा देती है !
........
समयानुसार जीवन को मोम बनना पड़ता है.....'
शुरू से अंत तक प्रवाह बना रहता है, कवितायें दिल को छूती हैं.....हर सन्दर्भ में कवि की चेतना जागृत है। संकलन की बहुत सारी रचनाओं में प्राणों की आहत वेदना झलकती है ।
रचनाओं के बीच से गुजरते हुए मुझे हर पल एहसास हुआ कि कवि ने सामाजिक विषमता को नज़दीक से महसूस किया है,एक अनुभवी दस्तावेज़ की तरह उनकी भावनाएं पुस्तक को एक नया आयाम देती है।
इनदिनों अपने समय का आइना बनकर लड़कियों कि छवि को दर्शानेवाला धारावाहिक 'बालिका वधू'लड़कियोंकी स्थिति को उजागर करता है । एक १३,१४ साल की लडकी , एक ३५ वर्ष का पुरूष ..............ऐसी बंदिशों से बाहर निकलकर लड़कियों ने अपनी मर्यादा की नई तस्वीर बनाई है , जिसे लव जी ने अपने काव्य में ढाला है ।
इस काव्य के उज्जवल पक्ष को यदि पुरूष समाज पढ़े और लड़कियों के आसमान को मुक्त करे तो बात बन सकती है। युगों से दबाकर रखी गई प्रकृति की सबसे मजबूत शक्सियत को आगे लेकर जाने में अगर पुरूष पाठक सहयात्री की भूमिका निभा सकें तो अपने पूर्वजों की उन गलतियों का प्रायश्चित कर सकेंगे , जो लड़कियों के साथ की गई। कवि के इस संग्रह का सार यही है।
भाषा की सरलता का ध्यान कवि ने पूरी तरह से रखा है ताकि एक आम परिवेश तक इसमें छुपा संदेश पहुँच सके। *
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*पुस्तक - लड़कियाँ छूना चाहती हैं आसमान *कवि- अशोक लव *प्रकाशन वर्ष-२००८, प्रकाशक-सुकीर्ति प्रकाशन,कैथल *मूल्य-१०० रु.*कवि सम्पर्क- फ्लैट-३६३,सूर्य अपार्टमेन्ट ,सेक्टर-६,द्वारका,नई दिल्ली-११००७५ (मो) 9971010063


